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झामुमो देगा दोनों सीटों पर उम्मीदवार, कांग्रेस का होगा बंटाधार

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द फॉलोअप, रांची
झामुमो के लगभग सभी वरीय नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राज्यसभा की दोनों सीटों पर उम्मीदवार देने का सुझाव दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा बुलायी गयी पार्टी के शीर्ष नेताओं की बैठक में उन्हें यह सुझाव दिया गया। इस बैठक में स्टीफन मरांडी, नलिन सोरेन, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपक बिरुआ, योगेंद्र प्रसाद, मथुरा महतो, हफीजुल हसन, विजय हांसदा सहित कई अन्य बड़े नेता शामिल थे। बैठक के बाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि नेताओं ने मुख्यमंत्री को दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया। अब मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ने और उम्मीदवार तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। मंत्री हफीजुल हसन ने एक कदम आगे बढ़ कर कहा कि झामुमो दोनों सीटों पर उम्मीदवार देगा। केंद्रीय अध्यक्ष अब अंतिम फैसला करेंगे। कांग्रेस द्वारा भी उम्मीदवार दिए जाने पर हफीजुल हसन ने कहा कि हमारा स्टैंड यही है।


झामुमो के वरिष्ठ नेताओं के सुझाव के बाद अब मुख्यमंत्री पर दोनों सीटों पर उम्मीदवार देने का दबाव बढ़ गया है। इस तरह अगर झामुमो दोनों ही सीटों पर चुनाव लड़ता है तो कांग्रेस का बंटाधार सुनिश्चित होगा। बताने की जरुरत नहीं है कि झामुमो के अभी 34, भाजपा के 21 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं। इसके अलावा राजद के चार, माले के दो, जदयू, लोजपा, आजसू तथा जेएलकेएम के एक-एक विधायक हैं। इसलिए संख्या गणित में भाजपा कांग्रेस पर भारी पड़ेगी। हालांकि राज्यसभा चुनाव में द्वितीय वरीयता का मत भी काफी महत्व रखता है।


झामुमो और कांग्रेस में रिफ्ट से भाजपा में खुशी
झामुमो और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी से भाजपा में खुशी की लहर दौड़ने लगी है। भाजपाई न सिर्फ राज्यसभा की एक सीट पर अपनी जीत को अब पक्की समझने लगे हैं, बल्कि उन्हें इसका असर राज्य सरकार की सेहत पर भी पड़ने का भरोसा है। यह भाजपा के लिए सुखद खबर है। भाजपाइयों और अन्य राजनीतिक दलों को अब भाजपा से एक ही संदेश की बेसब्री से प्रतीक्षा है कि उम्मीदवार कौन होगा। कोई बाहरी व्यक्ति टपकेगा या भाजपा झारखंड के ही किसी बड़े नेता को अपना प्रत्याशी बनाएगी। 


एक झामुमो और दूसरा कांग्रेस उम्मीदवार जीतेगाःआलमगीर आलम
झामुमो और कांग्रेस के बीच आपसी समन्वय की खाई काफी चौड़ी हो जाने के बाद भी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को अभी भी भरोसा है कि एक सीट झामुमो और दूसरा कांग्रेस जीतेगी। उन्होंने कहा कि हमारा गठबंधन मजबूत है। हम दोनों ही सीटों पर जीतेंगे। हालांकि उन्हें कौन बताए कि गठबंधन इतना मजबूत है तो फिर कांग्रेस अलग से उम्मीदवार की घोषणा क्यों कर दी और झामुमो भी अलग से अपना उम्मीदवार की घोषणा क्यों करने जा रहा है। इतना ही नहीं कांग्रेस के बीच से प्रणव झा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विरोध के स्वर भी सुनाई पड़ने लगे हैं। पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि पार्टी के निर्णय से उन्हें काफी दुख पहुंचा है। इस उम्र में स्वयं को उपेक्षित महसूस करना बेहद कष्टदायक है।


 

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