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गांव की पगडंडियों से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तक: रवि राज मुर्मू ने 'आंगेन' से रचा इतिहास

गांव की पगडंडियों से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तक: रवि राज मुर्मू ने 'आंगेन' से रचा इतिहास

द फॉलोअप, जमशेदपुर:

पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत जादूगोड़ा के एक छोटे से गांव कुमीरमुड़ी की मिट्टी, बचपन में बुजुर्गों से सुनी आदिवासी लोककथाएं और सिनेमा की बारीकियों को समझने की अदम्य जिज्ञासा, इन्हीं तीन चीजों ने रवि राज मुर्मू के उस पसपने की नींव रखी, जिसने आज राष्ट्रीय पटल पर झारखंड का मान बढ़ाया है। अपनी संताली लघु फिल्म 'आंगेन' के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2026) में 'सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक' (नॉन-फीचर) का प्रतिष्ठित सम्मान हासिल कर रवि राज ने साबित कर दिया है कि अगर जड़ों से मजबूत जुड़ाव हो, तो गांव की कहानियां भी दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंच सकती हैं।

गांव के स्कूल से FTII और फिर मुंबई तक का सफर
रवि राज की प्रारंभिक शिक्षा उनके गांव के स्कूल में ही हुई। सपनों को उड़ान देने के लिए वे जमशेदपुर आये और यहां के प्रतिष्ठित करीम सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही फिल्मों को महज देखने के बजाय, उनके निर्माण, तकनीक और पर्दे के पीछे की कहानी समझने में उनकी गहरी रुचि जगने लगी। इसी जुनून ने उन्हें पुणे स्थित देश के शीर्ष फिल्म संस्थान ‘फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (FTII) तक पहुंचाया। वहां उन्होंने 2016 से 2019 के बीच फिल्म एडिटिंग का कड़ा प्रशिक्षण लिया और सिनेमा को तकनीकी व रचनात्मक स्तर पर गहराई से समझा। पुणे से निकलने के बाद रवि राज ने मुंबई का रुख किया। वहां उन्होंने नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, जियो सिनेमा जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कई प्रतिष्ठित विज्ञापन प्रोजेक्ट्स के लिए भी काम किया। लेकिन महानगर की चकाचौंध और व्यावसायिक फिल्मी दुनिया की व्यस्तता भी उनके भीतर की ठेठ स्थानीय कहानियों को धुंधला नहीं कर सकी।

लोककथाओं से प्रेरणा लेकर रची 'आंगेन' की दुनिया
बचपन में गांव के बुजुर्गों से सुनी कहानियां रवि राज के जहन में हमेशा जीवित रहीं। इन्हीं अनुभवों और संताली संस्कृति को पर्दे पर उतारने के दृढ़ निश्चय ने लघु फिल्म ‘आंगेन’ को जन्म दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी माटी, परिवेश और भाषा को जिस खूबसूरती से सिनेमाई जामा पहनाया, उसने सीधे राष्ट्रीय जूरी का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह उपलब्धि सिर्फ रवि राज की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि संताली भाषा और स्थानीय कहानियों के लिए सिनेमा के क्षेत्र में एक नये युग की शुरुआत है। रवि राज मुर्मू की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके शैक्षणिक संस्थान में भी खुशी की लहर है। करीम सिटी कॉलेज के जन संचार विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD) नेहा तिवारी ने कहा कि हमारे विभाग की यात्रा करीब तीन दशक की है और इस दौरान हमने कई उपलब्धियां देखी हैं, लेकिन किसी पूर्व छात्र का राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होना हमारे लिए सबसे ज्यादा गर्व का क्षण है। रवि राज को मिला यह राष्ट्रीय पुरस्कार सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे करीम सिटी कॉलेज और हमारे विभाग की सफलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मान वर्तमान विद्यार्थियों को और भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करेगा।

Tags - Ravi Raj Murmu Angen Santali short film Best Debut Director Award Santali cinema