द फॉलोअप डेस्क
राज्य में नगर निकाय चुनाव को लेकर सरकार और अब निर्वाचन आयोग भी गंभीर है। कारण भी है। अगले 10 नवंबर को झारखंड हाईकोर्ट में नगर निकाय चुनाव को लेकर सुनवाई की तिथि तय है। उस दिन राज्य सरकार को चुनाव से संबंधित पूरा शिड्युल हाईकोर्ट को बताना है। इस कारण सरकार के स्तर पर और निर्वाचन आयोग के स्तर पर निकाय चुनाव को लेकर सक्रियता काफी बढ़ गयी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग से ईवीएम मशीन की मांग की थी। लेकिन निर्वाचन आयोग ने ईवीएम मशीन उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों की राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में नगर निकायों का चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार छठ पर्व के बाद राज्य निर्वाचन आयोग का कार्यालय खुलने के साथ ही बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने के संबंध में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।

लगभग 30 हजार ईवीएम मशीन चाहिए
जानकारी के अनुसार ईवीएम मशीन की अंतिम संख्या तो नामांकन और स्क्रुटनी की प्रक्रिया समाप्त होने पर तय होगी, लेकिन एक अनुमान के तहत राज्य में एक साथ सभी 50 नगर निकायों में चुनाव कराने के लिए लगभग 30 हजार से अधिक ईवीएम मशीन की जरूरत होगी। इसके साथ वीपी पैट व अन्य जरूरी पूरी यूनिट भी होगी।
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कुल 50 निकायों में होना है चुनाव
राज्य में निर्वाचन आयोग एक साथ सभी 50 नगर निकायों में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। इनमें नौ नगर निगम, 18 नगर परिषद और 22 नगर पंचायत के अलावा एक जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति शामिल है।
बैलेट पेपर से चुनाव होने पर मतगणना में लगेगा वक्त
ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव होने मतगणना की प्रक्रिया में काफी वक्त लगेगा। हाल में यह पहला मौका होगा जब किसी चुनाव में बैलेट पेपर का उपयोग किया जाएगा।
