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बच्चों की हत्या और लापता मामलों पर अल्पसंख्यक आयोग की चिंता, प्रशासन से मांगी रिपोर्ट 

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रांची   
झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने राज्य के विभिन्न जिलों में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े संवेदनशील मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आयोग के निर्देश पर पहले एक जांच दल हजारीबाग भेजा गया था, ताकि बच्चों की निर्मम हत्या के मामले की जांच की जा सके। उस समय हजारीबाग पुलिस प्रशासन ने मामले के खुलासे के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन अब तक न तो अपराधियों की गिरफ्तारी हो सकी है और न ही मामले का संतोषजनक समाधान हुआ है। इसी बीच हजारीबाग के केदु गांव से दो नाबालिग बच्चों के लापता होने और बाद में उनके शव बरामद होने की घटना ने क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। वहीं धनबाद के झरिया क्षेत्र में युवक दिलशाद अंसारी की गला रेतकर हत्या तथा जमशेदपुर के साकची बाजार से तीन वर्षीय बच्ची आफरीन के लापता होने की घटनाओं ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

आफरीन के लापता होने के मामले पर भी आयोग चिंतित

हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय दिलाना और मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि साकची बाजार से तीन वर्षीय बच्ची आफरीन का लापता होना अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक मामला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्ची के परिजनों ने उसके लापता होने के तुरंत बाद थाना में सूचना दी थी, लेकिन आरोप है कि तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के बजाय मामले को केवल लिखित सूचना तक सीमित कर दिया गया। बताया जाता है कि दो दिनों तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। बाद में एक पत्रकार द्वारा थाना पहुंचकर मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद विधिवत एफआईआर दर्ज की गई। आयोग ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए यह जांच करने की मांग की है कि प्रारंभिक स्तर पर कानूनी प्रक्रिया में देरी क्यों हुई।

आयोग का उद्देश्य केवल रिपोर्ट प्राप्त करना नहीं

उन्होंने कहा कि वे प्रार्थना करते हैं कि जमशेदपुर पुलिस बच्ची को सुरक्षित खोजकर उसके परिवार तक पहुंचाए तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न घटी हो। हिदायतुल्लाह खान ने बताया कि आयोग ने हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक, धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तथा जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के वरीय पुलिस अधीक्षक को अलग-अलग पत्र भेजकर मामलों की निष्पक्ष, त्वरित और व्यापक जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। आयोग ने अपने पत्र में अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही यदि किसी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग की गई है। इसके अतिरिक्त हिदायतुल्लाह खान ने धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक से फोन पर बातचीत कर दो दिनों के भीतर मामले में ठोस कार्रवाई करने और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो अल्पसंख्यक आयोग की टीम झरिया, धनबाद का दौरा कर पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करेगी। हिदायतुल्लाह खान ने बताया कि वे 04 जून को हजारीबाग का दौरा करेंगे और वहां जिला उपायुक्त (DC) तथा पुलिस अधीक्षक (SP) के साथ सर्किट हाउस में बैठक करेंगे। बैठक में कीदू गांव में दो नाबालिग बच्चों की हत्या के मामले की जांच की वर्तमान स्थिति, अब तक की गई कार्रवाई तथा आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल रिपोर्ट प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सभी मामलों का शीघ्र समाधान हो और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले।

पीड़ित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा

हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि आयोग किसी भी पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ेगा। आयोग हजारीबाग, धनबाद और जमशेदपुर के मामलों की गंभीरता से निगरानी कर रहा है तथा प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहा है। हमारी कोशिश है कि सभी मामलों में जल्द से जल्द सच्चाई सामने आए और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिले। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि आयोग निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड में हाल के दिनों में बच्चों के लापता होने और हत्या जैसी घटनाओं ने जनचिंता बढ़ा दी है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऐसे मामले किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न धर्मों और वर्गों के परिवार इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर राज्य सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन सच्चाई सामने लाने और दोषियों तक पहुंचने के लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच आवश्यक है। सरकार, पुलिस प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि सभी मामलों का शीघ्र खुलासा हो तथा पीड़ित परिवारों को न्याय मिले, जिससे जनता का विश्वास बना रहे।

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