रांची
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) झारखण्ड प्रांत का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में लोकभवन में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर राज्य की उच्च शिक्षा में व्याप्त गंभीर एवं छात्र-विरोधी विसंगतियों का आरोप लगाते हुए इसके निवारण के लिए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल का ध्यान राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा अव्यावहारिक रूप से झारखंड के महाविद्यालय में स्नातक में नामांकन सीटों में कटौती तथा कई विषयों की पढ़ाई बंद हो जाने, ग्रामीण क्षेत्रों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई समाप्त करने, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की समाप्ति, परीक्षाओं में भारी अनियमितता तथा हाल ही में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के विवादित परिणामों की ओर आकृष्ट कराया। अभाविप शिष्टमंडल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासनों के इन तुगलकी फैसलों के कारण ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के समक्ष शिक्षा से वंचित होने का एक अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है।

नियमित अध्ययन करना आर्थिक रूप से असंभव
प्रतिनिधिमंडल ने नई व्यवस्था के दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए राज्यपाल को बताया कि इस व्यवस्था से शिक्षा का अनुचित केंद्रीकरण हो रहा है। यदि किसी विषय की पढ़ाई केवल एक ही क्लस्टर कॉलेज में सीमित कर दी जाएगी, तो सुदूरवर्ती क्षेत्रों के गरीब विद्यार्थियों के लिए दूसरे शहरों में रहकर नियमित अध्ययन करना आर्थिक रूप से असंभव हो जाएगा। इससे उनके रहने, भोजन और आवागमन का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा, जिससे राज्य के सकल नामांकन अनुपात (GER) में भारी गिरावट आएगी और ड्रॉपआउट की दर बढ़ जाएगी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय कॉलेजों का शैक्षणिक अवमूल्यन होगा, योग्य शिक्षकों की विशेषज्ञता सीमित रह जाएगी और बहुविषयक शिक्षा (Multidisciplinary Education) का राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) का मूल उद्देश्य ही पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। अभाविप ने BBA, BCA, Biotechnology, Computer Science जैसे रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बंद करने तथा B.Ed. सहित शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को 'स्वनिर्पोजित' (Self-Financed) श्रेणी में रखकर फीस बढ़ाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया।

JPSC की कार्यप्रणाली का मुद्दा भी प्रखरता से उठाया
ज्ञापन के माध्यम से अभाविप ने JPSC की कार्यप्रणाली और 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों में कथित व्यापक भ्रष्टाचार व अपारदर्शिता का मुद्दा भी प्रखरता से उठाया। प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने बताया कि JPSC ने अपनी ही SOP का उल्लंघन करते हुए प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद मुख्य परीक्षा के लिए नियमानुसार 90 दिनों का अनिवार्य समय नहीं दिया। इसके अतिरिक्त, कुल 103 रिक्तियों के विरुद्ध जहां नियमानुसार 1,545 अभ्यर्थियों का चयन होना चाहिए था, वहीं आयोग ने बिना किसी तार्किक व सार्वजनिक Cut-off Marks अंक के 2,200 से अधिक अभ्यर्थियों को चयनित कर पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है। आयोग द्वारा जारी मॉडल उत्तर कुंजियों (Answer Keys) में लगातार चार बार संशोधन के बावजूद भारी त्रुटियां रहना, एक ही परीक्षा केंद्र से लगातार रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों का सफल होना और बिना सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के परिणाम जारी करना आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। अभाविप ने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराने और तब तक मुख्य परीक्षा को स्थगित रखने की मांग की है।
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परीक्षा सत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका
अभाविप ने राज्यपाल के समक्ष झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत छात्रसंघ से संबंधित धारा 77 में व्याप्त विसंगतियों को भी प्रमुखता से रखा। छात्र नेताओं ने कहा कि इस नए कानून में छात्रसंघ के उद्देश्यों को अत्यंत सीमित कर दिया गया है और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। कुलपतियों और प्राचार्यों को अत्यधिक नियंत्रण देकर छात्रसंघ की स्वायत्तता को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है, तथा सीनेट, सिंडिकेट व वित्त समिति जैसी मुख्य निर्णयकारी इकाइयों में छात्रों का प्रशासनिक प्रतिनिधित्व बेहद नगण्य कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने रांची विश्वविद्यालय में परीक्षा कार्य संभाल रही बाहरी एजेंसी NCFF द्वारा की जा रही गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाहियों से भी अवगत कराया, जिसके कारण परीक्षा सत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, और गलत जीएसटी भुगतान जैसे वित्तीय घोटाले सामने आ रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया कि नई व्यवस्था के तहत विषयों के केंद्रीकरण से झारखंड की अस्मिता से जुड़ी जनजातीय भाषाएं जैसे संथाली, मुंडारी, कुड़ुख, खड़िया, हो तथा क्षेत्रीय भाषाएं जैसे नागपुरी, खोरठा, कुर्माली, पंचपरगनिया सबसे अधिक प्रभावित होंगी।
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लाखों मेधावी विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय
ग्रामीण व जनजातीय बहुल क्षेत्रों के कॉलेजों में इन विषयों की पढ़ाई सीमित या बंद होने से स्थानीय स्तर पर इनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके कारण इन भाषाओं में रुचि रखने वाले सुदूरवर्ती क्षेत्रों के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे, जिससे नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत मातृभाषा और क्षेत्रीय संस्कृतियों को बढ़ावा देने का मूल संकल्प पूरी तरह विफल हो जाएगा। इस दौरान प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि यदि इन छात्र-विरोधी नीतियों और विसंगतियों का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो झारखंड के लाखों मेधावी विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा और उनका सरकारी भर्ती प्रणालियों से विश्वास उठ जाएगा। अभाविप ने राज्यपाल संतोष गंगवार से त्वरित हस्तक्षेप करते हुए पूरे परीक्षा तंत्र की निष्पक्ष जांच कराने, बंद किए गए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को छात्रहित में पुनः प्रारंभ करने, B.Ed. की फीस को सामान्य शुल्क संरचना के अंतर्गत लाने, स्नातकोत्तर (PG) शिक्षा का अनावश्यक केंद्रीकरण समाप्त करने, स्नातक (UG) स्तर पर स्वीकृत सीटों में की गई कटौती को बहाल कर अविलंब नामांकन प्रक्रिया शुरू करने, तकनीकी व गैर-तकनीकी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति का शीघ्र भुगतान करने तथा छात्रसंघ की पुरानी व प्रभावशाली व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग की है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात करने वाले अभाविप के प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष डॉ मौसमी पाल, प्रांत प्रमुख डॉ पंकज कुमार, प्रदेश संगठन मंत्री पशुपति उपमन्यु, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ आनंद ठाकुर, केंद्रीय कार्य समिति सदस्य दिशा दित्या, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल मेहता, प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय, संतोषी कुमारी एवं अंजली सिंह उपस्थित रही।