द फॉलोअप डेस्क
झारखंड हाईकोर्ट में CDPO भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के साथ JPSC की अन्य परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को निरस्त करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले दी गई अंतरिम राहत को बरकरार रखते हुए नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर लगी रोक को जारी रखा। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से अपना जवाब दाखिल कर दिया गया। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और चंचल जैन समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता और JPSC की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने अदालत के समक्ष दलीलें पेश कीं।

सरकार ने मांगा एक सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता ने बहस की। सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया। हालांकि, अदालत ने इतना समय देने से इनकार करते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सिर्फ 48 घंटे का समय दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित करते हुए उससे पहले सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

CID जांच की गति पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए CID जांच की गति को धीमा बताया। कोर्ट ने नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले पर भी कड़ी टिप्पणी की और मौखिक रूप से कहा कि सरकार ने ‘तुगलकी फरमान’ जारी कर नियुक्तियां रद्द कर दीं। सरकार की ओर से अतिरिक्त समय की मांग किए जाने पर अदालत ने कहा कि समय दिन में नहीं, बल्कि घंटों में मिलेगा। अब इस मामले में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजर है।