अभिषेक पीयूष/सरायकेला-खरसावां:
सरायकेला-खरसावां जिला के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कथित तौर पर मोबाइल टॉर्च की रौशनी में प्रसव की कोशिश के दौरान मां और नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना बीते 30 अप्रैल (गुरुवार) रात की है। हाथीसिरिंग गांव की रहने वाली विनीता बानरा ने प्रसव के दौरान दम तोड़ दिया। आरोप है कि असुरक्षित प्रसव की वजह से नवजात शिशु की भी मौत हो गई। इस घटना से झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के दावों की परत उधड़ गई है। इस घटना ने उन दावों की पुष्टि की है जहां कहा जाता है कि अब भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव जैसी गंभीर प्रक्रिया के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

नर्सों ने मोबाइल की रौशनी में प्रसव कराना चाहा
मृतका विनीता के पति दुर्गाचरण बानरा का आरोप है कि सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं थे। अस्पताल में बिजली नहीं थी और नर्सों ने मोबाइल टॉर्च की रौशनी में प्रसव कराने का प्रयास किया। दुर्गाचरण बानरा बताते हैं कि, बुधवार को दिन में वह अपनी पत्नी विनीता बानरा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजनगर लाए। सारी रिपोर्ट नॉर्मल थी। उनकी पत्नी विनीता सामान्य तरीके से चल-फिर रही थीं। भोजन कर रही थीं। बुधवार की रात को अस्पताल में दिन अच्छा बीता। गुरुवार को भी पूरे दिन किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। शाम को विनीता को प्रसूता कक्ष में ले जाया गया।
दुर्गाचरण बानरा बताते हैं कि कुछ ही समय बाद नर्सें भागती हुई आईं और पूछा कि आपके साथ और कौन आया है। मैंने मेरे साथ अस्पताल आईं मेरी बुआ और बड़ी मां को भेजा। थोड़ी देर बाद नर्सें दोबारा आईं और इसबार उनके चेहरे पर घबराहट थी। उन्होंने मुझे प्रसूता कक्ष की ओर चलने को कहा। दुर्गाचरण का दावा है कि उन्होंने अपनी पत्नी विनीता को वहां बेहोशी की हालत में पाया। बकौल दुर्गाचरण उन्होंने नर्सों से कहा कि यदि सामान्य प्रसव में कठिनाई आ रही है तो आप सर्जरी की प्रक्रिया करें। मैंने उनसे विनीता को रेफर करने की भी विनती की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
दुर्गाचरण का आरोप है कि सीएचसी राजनगर में प्रसव के समय बिजली भी नहीं थी और नर्सें मोबाइल के टॉर्च की रौशनी में जबरन सामान्य प्रसव कराने का प्रयास करती रहीं। मैं देख सकता था कि मेरी पत्नी थक चुकी है। पति दुर्गाचरण का आरोप है कि जब उन्होंने नर्सों से बार-बार सर्जरी करने, डॉक्टर को बुलाने या रेफर करने की विनती की तो नर्सों ने नाराज होकर उनको और उनके साथ आई 2 महिलाओं को विनीता के साथ लेबर रूम में छोड़ दिया और बाहर निकल गईं। बाद में विनीता ने मरे हुए बच्चे को जन्म दिया और खुद भी चल बसीं।
दुर्गाचरण बानरा बताते हैं कि उनकी पत्नी विनीता बानरा हाथीसिरिंग गांव की सहिया थीं। खुद भी स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी थीं, बावजूद इसके यदि उनके प्रसव में लापरवाही बरती गई तो आम लोगों के साथ क्या होता होगा। दुर्गाचरण बानरा कहते हैं कि विभाग को देखना होगा कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति की जान ना जाए। वह पुलिस के पास भी लिखित शिकायत देने की तैयारी में हैं।
शुक्रवार को विनीता बानरा के पति दुर्गाचरण बानरा समेत अन्य परिजन अस्पताल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।

राजनगर सीएचसी की घटना से उठे गंभीर सवाल
सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर सीएचसी की यह घटना कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जो किसी भी राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, वहां बुनियादी सुविधा जैसे बिजली तक क्यों नहीं थी? प्रसव जैसे संवेदनशील समय में डॉक्टर की अनुपस्थिति क्या सामान्य बात है?

ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कुंकल का क्या कहना है!
बहरहाल, ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कुंकल ने इस मामले को ‘पोस्टपार्टम हेमरेज’ यानी प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव का केस बताया है। एक ऐसी स्थिति जो वाकई बेहद गंभीर होती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस गंभीरता से निपटने के लिए अस्पताल तैयार था? अगर बिजली, उपकरण और विशेषज्ञ समय पर उपलब्ध होते, तो क्या नतीजा कुछ और हो सकता था?
राजनगर सीएचसी की यह घटना स्वास्थ्य विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। सरकारी योजनाओं में मातृ मृत्यु दर घटाने की बात जरूर होती है, लेकिन जब प्रसव कक्ष ही अंधेरे में डूबा हो, तो ये दावे खोखले नजर आते हैं।
ऐसे में अब सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है। ताकि अगली बार किसी प्रसव कक्ष में रोशनी हो और जिंदगी अंधेरे में न खो जाये।