रांचीः
बुढ़मू अंचल अधिकारी (CO) सच्चिदानंद कुमार वर्मा की गिरफ्तारी को लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने रविवार को हुई आपात बैठक में इस कार्रवाई को अवैध, असंवैधानिक और दमनकारी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। संघ ने कहा कि अगर अधिकारी को न्याय नहीं मिला, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। संघ का आरोप है कि ACB ने कानून और तय प्रक्रिया का पालन किए बिना CO को रात करीब 3 बजे उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि परिवार को समय पर गिरफ्तारी की जानकारी भी नहीं दी गई, जो सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।

रिश्वत लेते रंगेहाथ नहीं पकड़े गए अंचलाधिकारी!
संघ ने तर्क दिया है कि भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम-2018 की धारा 17A के तहत किसी भी लोकसेवक के खिलाफ आधिकारिक कार्यों से जुड़े मामलों की जांच या गिरफ्तारी से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति जरूरी है। इस केस में अंचलाधिकारी को न तो रंगेहाथ पकड़ा गया और न ही उनके पास से कोई पैसा मिला, इसलिए सरकार की पूर्वानुमति के बगैर यह कार्रवाई गैरकानूनी है।
संघ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए जरूरी है कि आरोपी ने सामने से पैसों की मांग की हो या उसे स्वीकार किया हो, जबकि इस मामले में कथित लेन-देन या मांग में अंचलाधिकारी की संलिप्तता की कोई जानकारी नहीं है।
संघ ने कहा कि कानून का मूल सिद्धांत कहता है कि पुलिस हिरासत में किसी सह-आरोपी द्वारा रात में दिया गया इकबालिया बयान कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं होता। केवल सह आरोपी के बयान को आधार बनाकर सीधे एक राजपत्रित अधिकारी को अपराधी मान लेना दरअसल, न्याय व्यवस्था का मजाक बनाने के समान है।

राजपत्रित अधिकारी की अपमानजनक गिरफ्तारी
झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने कहा कि पहले आरोपी की गिरफ्तारी शाम को 7 बजे की गई, जबकि अंचलाधिकारी को उनके आवास से तड़के 3 बजे गिरफ्तार किया है, जबकि डीके बासु बना पश्चिम बंगाल सरकार के केस मे सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार निर्देश जारी करते हुए कहा था कि किसी प्रतिष्ठित नागरिक या अधिकारी को बिना किसी असाधारण परिस्थिति के रात के अंधेरे में या सुबह यूं अपमानजनक तरीके से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
संघ ने अरनेश कुमार केस का हवाला देते हुए कहा कि बुढ़मू अंचलाधिकारी की गिरफ्तारी में बीएनएसएस की धारा 35 (पूर्ववर्ती 41CrPC) के तहत पहले नोटिस जारी करना जरूरी होता है। संघ ने कहा कि एक स्थापित राजपत्रित अधिकारी, जिसके फरार होने या सबूत मिटाने की कोई आशंका नहीं थी, उसे बिना किसी प्राथमिक जांच या नोटिस के सीधे तड़के गिरफ्तार करना बताता है कि एसीबी कितना निरंकुश है।
संघ ने आरोप लगाया कि एसीबी ने अंचलाधिकारी की गिरफ्तारी की सूचना उनके घरवालों को नहीं दी।

बुढ़मू अंचलाधिकारी षड्यंत्र का शिकार हो गये हैं!
संघ ने कहा कि बुढ़मू अंचलाधिकारी प्रथम दृष्टा भू-माफिया का शिकार हुए हैं। कानून से संरक्षण मिलने की जगह उन्हें दंडित किया जा रहा है। संघ ने पूरे मामले की जांच के लिए अपर सचिव स्तर के एक पदाधिकारी की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमिटी का गठन किया है जो अपनी जांच रिपोर्ट संघ के सामने पेश करेगी।
संघ ने कहा कि हम भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करते, लेकिन कानून के नाम पर अपनाई जा रही दमनकारी और मनमाननी कार्यशैली को मूकदर्शक बनकर बर्दाश्त भी नहीं कर सकते।