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झारखंड के 35 हजार स्कूलों को 3 माह से नहीं मिला मिड–डे–मील का पैसा, 30 लाख बच्चों को कैसे मिलेगा खाना!

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रांची

झारखंड के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि, गर्मी की छुट्टी तक राशि मिलने की संभावना थी, लेकिन अब तक राशि नहीं मिल सकी है। शिक्षकों के अनुसार, पिछले महीनों में पूरक पोषाहार अंडा के लिए जो राशि मिली थी, उसकी मदद से जैसे-तैसे मिड-डे मील का संचालन जारी रखा जा सका, लेकिन अब वह सहारा भी खत्म हो चुका है। स्कूलों को सब्जी, दाल, तेल, मसाला और ईंधन जैसी सामग्रियां खरीदनी पड़ती हैं। इस बजटीय कमी के कारण राज्य के 35,500 स्कूलों के लगभग 30 लाख बच्चों का निवाला दांव पर लग गया है। फिलहाल, स्कूली बच्चे भूखे न रहें, इसके लिए शिक्षक अपनी जेब से पैसे लगाकर और दुकानदारों से उधार लेकर किसी तरह इस व्यवस्था को चला रहे हैं, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी यह फंड पूरी तरह ठप है।


शिक्षकों की जेब और 'उधारी' के भरोसे चल रही योजना
फंड के अभाव में योजना बंद न हो और बच्चे भूखे न रहें, इसके लिए स्कूलों के शिक्षक खुद ढाल बनकर खड़े हैं। राज्यभर के शिक्षक अपनी पॉकेट मनी लगाकर मिड-डे मील की व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसके अलावा, स्थानीय दुकानदारों से राशन और हरी सब्जियां उधारी पर ली जा रही हैं। शिक्षकों ने दुकानदारों को भरोसा दिलाया था कि गर्मी की छुट्टियों के बाद सरकारी राशि आते ही उनका भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन छुट्टियां खत्म होने के बाद भी पैसे नहीं आए। 
बड़े और सुदूर ग्रामीण स्कूलों पर बढ़ा दबाव
इस स्थिति के कारण सबसे ज्यादा परेशानी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों और उन बड़े स्कूलों में हो रही है जहां बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है। राशन और सब्जी सप्लाई करने वाले दुकानदार अब शिक्षकों पर बकाया राशि के भुगतान के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। वादे के मुताबिक भुगतान न होने से शिक्षकों की साख भी दांव पर लगी है। शिक्षक अब अपने स्तर से इतनी बड़ी व्यवस्था को आगे खींच पाने में पूरी तरह अक्षम महसूस कर रहे हैं। 
क्या है प्रति बच्चा तय कुकिंग कॉस्ट?
सरकारी प्रावधानों के तहत मिड-डे मील के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर राशि देती है। वर्तमान में निर्धारित दरों के अनुसार, प्राथमिक स्तर कक्षा 1 से 5वीं के लिए ₹6.78 प्रति बच्चा प्रतिदिन और उच्च प्राथमिक स्तर कक्षा 6 से 8वीं के लिए ₹10.17 प्रति बच्चा प्रतिदिन का आवंटन किया जाता है। हालांकि, गर्मी की छुट्टी तक राशि मिलने की संभावना थी, लेकिन अबतक राशि नहीं आ सकी है। शिक्षकों के अनुसार, पिछले महीनों में पूरक पोषाहार अंडा के लिए जो राशि मिली थी, उसकी मदद से जैसे-तैसे मिड-डे मील का संचालन जारी रखा जा सका, लेकिन अब वह सहारा भी खत्म हो चुका है। 
शिक्षकों ने लगाई सरकार से गुहार
लगातार बढ़ते कर्ज और मानसिक दबाव के बीच राज्य के शिक्षक संगठनों और स्कूल प्रबंधन समितियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार जल्द से जल्द कुकिंग कॉस्ट की बकाया राशि जारी करे, ताकि राज्य के नौनिहालों को बिना किसी बाधा के नियमित और पौष्टिक भोजन मिलता रहे और शिक्षकों को इस आर्थिक और मानसिक तनाव से मुक्ति मिले।

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