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रस्मों को छोड़कर सपनों को चुना, धनबाद निवासी पति-पत्नी बने अधिकारी; 70वीं BPSC में पाई सफलता

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द फॉलोअप डेस्क
धनबाद जिले के झरिया के एक नवविवाहित दंपति ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा के अंतिम परिणाम में शानदार सफलता हासिल कर पूरे इलाके का नाम रोशन किया है। झरिया के चौथाई कुल्ही, भालगोड़ा निवासी विकास कुमार सिंह और उनकी पत्नी कोमल कुमारी सिंह की सफलता की कहानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। 11 दिसंबर 2024 को दोनों की शादी हुई थी, जबकि 13 दिसंबर को 70वीं बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हुई। शादी की रस्में अभी पूरी भी नहीं हुई थीं कि दोनों अपने सपनों को प्राथमिकता देते हुए परीक्षा देने के लिए केंद्र रवाना हो गए। उस समय लिया गया यह फैसला आज उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि में बदल गया है।

अंतिम परिणाम में दोनों ने हासिल की बड़ी सफलता

70वीं बीपीएससी परीक्षा के अंतिम परिणाम में विकास कुमार सिंह का चयन प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) के पद पर हुआ है। उन्होंने 1058वीं रैंक प्राप्त की है। वहीं, बिहार के बेगूसराय की निवासी कोमल कुमारी सिंह ने 489वीं रैंक हासिल कर उप पुलिस अधीक्षक (DYSP) बनने का सपना साकार कर लिया है। शादी के महज दो दिन बाद परीक्षा देने का उनका साहस, समर्पण और आत्मविश्वास आज रंग लाया है। उनकी इस सफलता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है और लोग इसे दृढ़ संकल्प की मिसाल बता रहे हैं।

परिवार का सहयोग बना सफलता की मजबूत नींव

विकास कुमार सिंह अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार, विशेषकर बड़े भाई सूरज कुमार सिंह के मार्गदर्शन और माता-पिता के निरंतर सहयोग को देते हैं। उनका परिवार भी उपलब्धियों से भरा हुआ है। छोटे भाई राहुल कुमार सिंह भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के मुखिया सुधीर कुमार सिंह दूध व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जबकि माता इंदु देवी ने अपने बच्चों को बचपन से ही शिक्षा, अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया। आज इस परिवार के तीनों बेटे सरकारी सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जो परिवार के संघर्ष, संस्कार और समर्पण की कहानी बयां करता है।

कोमल ने नौकरी छोड़कर हासिल किया डीएसपी बनने का सपना

कोमल कुमारी सिंह की सफलता की यात्रा भी कम प्रेरणादायक नहीं है। वह पहले राजस्व कर्मचारी के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य लेकर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गईं। लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने दूसरे प्रयास में डीएसपी का पद हासिल कर लिया। विकास और कोमल की यह कहानी साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो जीवन के बड़े से बड़े पारिवारिक अवसर भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते। उनकी उपलब्धि आज हजारों प्रतियोगी छात्रों को अपने सपनों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दे रही है।

 

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