जामताड़ा
जामताड़ा शहर के युवाओं और समाजसेवियों ने मिलकर एक ऐसी पहल की शुरुआत की है, जिससे रातों को खाली पेट सोने वाले मजबूर और असहाय लोगों को मदद मिल सकेगी। जामताड़ा में 'रोटी बैंक' की स्थापना का निर्णय लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कैंप लगाकर जरूरतमंदों को रात्रि भोजन उपलब्ध कराना है।
गांधी मैदान में हुई अहम बैठक
इस मुहिम को धरातल पर उतारने के लिए रविवार देर शाम स्थानीय गांधी मैदान में समाजसेवियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि समाज का कोई भी गरीब व्यक्ति रात में भूखा न रहे, इसके लिए 'रोटी बैंक' का संचालन पूरी निष्ठा के साथ किया जाएगा। इस दौरान संगठन की रूपरेखा और कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
16 मई से होगा शुभारंभ
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, 16 मई को अमावस्या के शुभ अवसर पर स्टेशन रोड स्थित काली मंदिर के पास से इस सेवा का शुभारंभ किया जाएगा। पहले दिन विशेष रूप से खिचड़ी का वितरण होगा, जिसके बाद नियमित तौर पर प्रतिदिन रोटी-सब्जी खिलाई जाएगी। अगली तैयारी बैठक 12 मई को गांधी मैदान स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में आयोजित की जाएगी।
रोटी बैंक की मुख्य विशेषताएं:
पूरी तरह गैर-राजनीतिक: यह संगठन किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं होगा।
सामूहिक भागीदारी: संगठन में कोई 'पद' नहीं होगा, सभी सदस्य समान होंगे। खाते का संचालन प्रशांत कुमार, मनीष कुमार उर्फ बबलू और एक अन्य सदस्य के नाम से होगा। लेखा-जोखा की जिम्मेदारी शिक्षक प्रशांत कुमार संभालेंगे।
जन-सहयोग:लोग अपने जन्मदिन या किसी भी खुशी के अवसर पर स्वेच्छा से एक दिन के भोजन का खर्च उठा सकते हैं। दानदाताओं के नाम की सार्वजनिक घोषणा भी की जाएगी।
सहयोग की अपील
समिति ने निर्णय लिया है कि प्रतिदिन कम से कम 20 व्यक्तियों के भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। युवाओं ने अधिक से अधिक लोगों को इस नेक कार्य से जुड़ने की अपील की है। बैठक में राहुल तिवारी, करण कुमार, मोनू शाह सहित कई उत्साही युवा मौजूद थे। जामताड़ा की यह पहल न केवल भूख के खिलाफ एक जंग है, बल्कि समाज में एकजुटता और संवेदनशीलता का एक अनुपम उदाहरण भी है।