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जमशेदपुर: स्वास्थ्य व्यवस्था पर उपायुक्त का कड़ा रुख, लापरवाही बरतने वालों पर गिरेगी गाज

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जमशेदपुर
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त राजीव रंजन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। समाहरणालय सभागार में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त राजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि इलाज के साथ-साथ आम जनता का भरोसा जीतना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को कार्रवाई की चेतावनी देते हुए प्रखंड स्तर पर नियमित निगरानी और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल दिया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की गहन समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सेवाओं को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाए। उन्होंने प्रखंड स्तर पर प्रत्येक माह नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने का भी निर्देश दिया, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी और अधिक मजबूत हो सके।
मिर्गी मरीजों की पहचान और इलाज में तेजी के निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और सेवाओं को धरातल पर प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। प्रोजेक्ट ‘उल्लास’ की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने मिर्गी रोगियों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन और मरीजों के सतत फॉलोअप को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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डायलिसिस सेवा बाधित नहीं होनी चाहिए
सदर अस्पताल और घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में संचालित डायलिसिस सेवाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में यह सेवा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मशीनों के रखरखाव और सर्विसिंग कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया गया, ताकि मरीजों को निर्बाध इलाज मिल सके।कुपोषित बच्चों के उपचार पर विशेष फोकस
शिशु केयर यूनिट और कुपोषण उपचार केंद्रों की समीक्षा में बहरागोड़ा, घाटशिला, मुसाबनी, पोटका और टेल्को स्थित एमटीसी में कम बेड ऑक्यूपेंसी पर चिंता जताई गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि महिला एवं बाल विकास विभाग, सेविका और सहिया के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को उपचार से जोड़ा जाए। अभिभावकों को भी एमटीसी के लाभों के प्रति जागरूक करने को कहा गया। टीकाकरण कार्यक्रम में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए घर-घर सत्यापन अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। साथ ही, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए होम डिलीवरी के मामलों का विश्लेषण कर ठोस समाधान निकालने और जागरूकता अभियान तेज करने को कहा गया।
मौसमी बीमारियों को लेकर अलर्ट
डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग, साफ-सफाई और जनजागरूकता अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही टीबी उन्मूलन, कुष्ठ उन्मूलन और एनीमिया मुक्त भारत अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गयी। दूरदराज के क्षेत्रों में एनीमिया जांच और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। बैठक के दौरान बाराद्वारी स्थित कुष्ठ आश्रम में 24 से 30 मई तक आयोजित होने वाले समर कैंप के पोस्टर का भी विमोचन किया गया। इस कैम्प में बच्चे विभिन्न रचनात्मक और शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेंगे।  बैठक में सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, एसीएमओ डॉ. अजय सिन्हा, डॉ. मृत्युंजय धावड़िया सहित जिले के सभी चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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