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उलझे मुद्दे जल्द नहीं सुलझे तो झारखंड की राजनीति दूर तक प्रभावित होगी, कुछ नये संकेत भी मिलेंगे

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रांची
14 मई को पूर्व मंत्री आलमगीर आलम जेल से बाहर निकल आए। 15 मई तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भी रांची लौट आने की संभावना है। बेंगलुरू गए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी 16 मई को वापस लौट रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू 18 मई को रांची आने वाले थे। उनके पैर में मोच आ गयी है। इसलिए अब उनके झारखंड प्रदेश कांग्रेस में भी आयी मोच में सुधार के बाद रांची आने की संभावना है। इसी बीच 17 मई को जेटेट नियमावली में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने के लिए मंत्रियों की पांच सदस्यीय कमेटी की बैठक है। निर्वाचन आयोग ने 20 जून से झारखंड में विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रारंभ करने की घोषणा कर दी है।  दीपक प्रकाश और शिबू सोरेन के निधन से रिक्त हुई राज्यसभा की दूसरी सीट का कार्यकाल भी 21 जून को पूरा हो रहा है। ये सब महत्वपूर्ण तिथियां और कुछ अन्य ज्वलंत मुद्दे ऐसे हैं जो आनेवाले दिनों में झारखंड की राजनीति को दूर तक प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रेजरी घोटाले में ईडी की इंट्री भी झारखंड की राजनीति को झकझोड़ेगी।


यहां मालूम हो कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के बाद कांग्रेस और सरकार में उठा तूफान अभी पूरी तरह ठंढ़ा नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने  के राजू को लिखे पत्र में 314 सदस्यीय जंबोजेट प्रदेश कमेटी पर सवाल खड़ा किया है। वहीं उन्होंने पार्टी के विरोध में बोलने और एक्ट करने वालों को कमेटी में महत्व दिए जाने पर कड़ा एतराज जताया है। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में किशोर ने जंबोजेट कमेटी के बैठने व अन्य व्यवहारिक बिंदुओं को रेखांकित किया है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को लिखे एक अन्य पत्र में उन्होंने 17 मई को होनेवाली बैठक से पूर्व भोजपुरी, मगही और अंगिका पर पार्टी का नजरिया स्पष्ट करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने घरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी देने की मांग की है। ये सब कुछ ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं जिसका कांग्रेस पार्टी के साथ साथ उलझती सरकार भी सम्मान जनक हल चाहती है। 


के राजू का 18 मई को प्रस्तावित रांची दौरे में इन मुद्दों के हल ढूंढे जाने की उम्मीद की जा रही थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को भरोसा था कि प्रदेश प्रभारी के आने पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी दूर करने की कोशिश की जाएगी। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के जेल से निकल जाने के बाद प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी और आलमगीर आलम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल कर बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश करेंगे। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को एक सीट दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करेंगे। क्योंकि निर्वाचन आयोग अब कभी भी झारखंड में राज्यसभा चुनाव की घोषणा कर सकता है। 


एसआईआर और 17 मई की बैठक भी बहुत कुछ बोलेगी
भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट की परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने के मुद्दे पर 17 को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में बैठक होगी। इस बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय, संजय प्रसाद यादव, योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार सोनू भी शामिल होंगे। कहने की जरुरत नहीं कि राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय मगही, भोजपुरी और अंगिका के प्रबल समर्थक हैं। इन दोनों मंत्रियों ने कैबिनेट की बैठक में जोरदार ढंग से अपनी बात भी रखी थी। लेकिन झामुमो मंत्रियों के विचार कांग्रेस के दोनों मंत्रियों से इतर हैं। इसलिए 17 की बैठक के नतीजे भी इंडिया गठबंधन सरकार को कई संदेश देंगे।


एसआईआर का विरोध और समर्थन
भाजपा छोड़ राज्य सरकार में शामिल सभी दल एसआईआर के विरोधी हैं। अब एसआईआर 20 जून से प्रारंभ होने जा रहा है। इस परिस्थिति में झामुमो के विरोध की आक्रमकता का पैमाना भी बहुत कुछ कहेगा। हालांकि कांग्रेस की आक्रमकता पहले से जग जाहिर है। राजद और वामदल भी खुल कर आग उगलेगा। इसका पूरा असर झारखंड की राजनीति पर पड़ेगा।
 

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