हजारीबाग
हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड क्षेत्र के बेस पंचायत का मरहांद गांव जहां विकास के नाम पर लगी आयरन स्पंज फैक्ट्रियां अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही हैं। फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं, उड़ता आयरन डस्ट और खुले में फेंका जा रहा वेस्टेज जिससे आज सैंकड़ों किसान बर्बादी के कगार पर आ पहुंचे है। पानी के गिरते स्तर की चिंता और स्वास्थ्य पर पड़ते असर की शिकायतों के बीच वो कई सवाल पूछ रहे हैं। मरहांद गांव और इसके आसपास के इलाके में तीन आयरन स्पंज फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। इनमें नरसिम्हा आयरन एंड स्टील फैक्ट्री, झारखंड सेल्स एजेंसी सहित अन्य इकाइयां शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और आयरन डस्ट आसपास के करीब चार गांवों तक पहुंच रहा है। सुबह होते ही घरों, पेड़-पौधों और खेतों पर काली धूल की परत नजर आती है। रात में यह फैक्ट्रियां अपने पूरे रफ़्तार में काम करती है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय मानकों का पालन नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि कोयले और आयरन डस्ट के कारण कई वर्षों से खेती प्रभावित हो रही है। किसान बताते हैं कि हर बार फसल लगाने के बाद पैदावार खराब हो जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अगर फसल तैयार भी हो जाए तो गांव का नाम सुनकर ही बाजार में भी उनकी फसल को उचित कीमत नहीं मिल पाती है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। सांस से जुड़ी समस्याओं सहित कई तरह की परेशानियां बढ़ने की शिकायत की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि फैक्ट्रियों में प्रभावी फिल्टर सिस्टम नहीं होने के कारण धुआं सीधे खुले वातावरण में छोड़ा जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
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भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा
इसके अलावा फैक्ट्री से निकलने वाले वेस्टेज के निपटारे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक कचरे को खुले स्थानों और गांव के तालाबों के आसपास फेंका जा रहा है, जिससे जल स्रोतों के प्रदूषित होने और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इन फैक्ट्री के कारण से चार गांव के हजारों परिवार अब खतरे में आ गए है ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है और कई जगहों पर पानी के लिए 700 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है। इस मामले में जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने निजी संबंधों का हवाला देते हुए बात करने से ही मना कर दिया अब ग्रामीण प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मांग कर रहे हैं कि फैक्ट्रियों की जांच कराई जाए और पर्यावरण सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि उद्योग भी चले और लोगों का जीवन भी सुरक्षित रहे।