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26 साल में 8 बाहरी नेता पहुंचे राज्यसभा, पर एक भी झारखंड के विधायक नहीं

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द फॉलोअप, रांची
झारखण्ड से 2025 तक राज्यसभा के 31 स्थानों को भरने के लिए 7 उपचुनाव और 12  दो वर्षीय  सहित 19 चुनाव हुए। इतने लंबे काल में विधानसभा का सदस्य रहते हुए एक भी सदस्य राज्यसभा नहीं भेजा गया। प्रत्याशी भी नहीं बनाया गया। एक सदस्य को राज्य सभा भेजने के लिए पर्याप्त संख्या बल था। बीजेपी के पास पहली , दूसरी और चौथी  विधानसभा में क्रमशः 33, 31 और 43 सदस्य थे। पांचवीं विधान सभा में झामुमो के 28 सदस्य थे और वर्तमान छठी विधानसभा में 34 सदस्य हैं। तीसरी विधानसभा में गठबंधन के रूप में सत्तापक्ष और विपक्ष के पास 28 से अधिक संख्या बल था।

विधायक रहते हुए कोई नहीं पहुँचा राज्यसभा

झारखण्ड से अब तक 31 सदस्य राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए, जिनमें भाजपा से 13, झामुमो 8, काँग्रेस 5, जनता दल युनाइटेड 1, आरजेडी 1 और 3 सीट पर निर्दलीय निर्वाचित हुए हैं। झारखण्ड राज्य गठन के बाद शिबू  सोरेन दो बार, स्टीफेन मरांडी, हेमन्त सोरेन, प्रदीप कुमार बलमुचु और सरफराज अहमद जब राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए, उस वक्त वे झारखण्ड विधानसभा के सदस्य नहीं थे। 

राज्य के बाहर के 8 सदस्य निर्वाचित

झारखंड से अब तक ऐसे 8 सदस्य राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए, जो राज्य से बाहर के थे । दिग्विजय सिंह (जेडीयू)- 2002, एस .एस. अहलूवालिया (भाजपा)- 2006,  कुंवर दीप सिंह (झामुमो)- 2010, परिमल नथवाणी (निर्दलीय) -2008 एवं 2014, प्रेमचन्द गुप्ता (आरजेडी) -2014 ,एम जे अकबर (भाजपा) - 2015, और मोख्तार अब्बास नकबी (भाजपा) -2016 में झारखण्ड से यहाँ  के सदस्यों द्वारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित किये गये।

प्रत्याशी बनने के लिए राज्य की स्थानीयता अनिवार्य नहीं

 अभी तक यह प्रावधान नहीं है कि राज्यसभा का  सदस्य होने के लिए उस राज्य की स्थानीयता होनी ही चाहिए। कुलदीप नैयर की एक याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 2004 की द्विवार्षिक निर्वाचन अधिसूचना, जो 04.06.2004 को जारी होनी थी, पर रोक लगा दी थी। न्यायालय के आदेश  से रोक अंतरिम रूप से हटी और 09.06.2004  को चुनाव की अधिसूचना जारी हुई । न्यायालय के आदेश  से चुनाव में निर्वाचित प्रत्याशियों को इस शर्त के साथ प्रमाण पत्र दिए गए थे  कि निर्वाचन का परिणाम न्यायालय के अंतिम निर्णय  के आलोक में प्रभावी होगा। याचिका के अन्तिम निर्णय से राज्य सभा का प्रत्याशी बनने के लिए राज्य की स्थानीयता का विचार समाप्त हो गया। (साभार)

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