द फॉलोअप डेस्क
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर झारखंड के अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी), पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं के लिए संचालित प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सामाजिक समानता और सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है, लेकिन वर्तमान में केंद्र से मिलने वाली राशि राज्य की वास्तविक आवश्यकता की तुलना में काफी कम है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि झारखंड में पिछड़ा वर्ग की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाली सहायता पर्याप्त नहीं होने के कारण राज्य सरकार को छात्रवृत्ति भुगतान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

पत्र में वित्तीय आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य ने प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 66.14 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि केंद्र से केवल 12.61 करोड़ रुपये मिले। वहीं 2025-26 में 45.91 करोड़ रुपये की आवश्यकता के मुकाबले केंद्र से महज 3.95 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में भी राज्य द्वारा किए गए व्यय की तुलना में केंद्र की सहायता काफी कम बताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वित्तीय अंतर का सीधा असर लाखों पात्र छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है।

हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि झारखंड जैसे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्रांश बढ़ाया जाए तथा ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त राशि जारी की जाए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित होंगे, बल्कि राज्य के लाखों छात्र देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में भी बेहतर योगदान दे सकेंगे।