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CM हेमंत सोरेन ने मोरहाबादी मैदान में फहराया तिरंगा, युवाओं से लेकर रोजगार और विकास तक कही बड़ी बातें

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द फॉलोअप डेस्क
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि "जोहार मेरे प्यारे झारखंड वासियों, स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर आप सभी को हृदय से शुभकामनाएं और अनेक-अनेक बधाइयां। आज हम उस महान भारत की स्वतंत्रता का उत्सव मना रहे हैं जिसके लिए असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा उन सभी महान विभूतियों को जिनके त्याग और संघर्ष ने भारत को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। झारखंड की इस पवित्र धरती ने भी स्वतंत्रता, स्वाभिमान और न्याय के लिए अनेक महान योद्धा देश को दिए। जिनमें भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव, तिलका मांझी, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर, शेख भिखारी और हमारे सभी अमर शहीद शामिल हैं। मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। साथ ही मैं दिशोम गुरु आदरणीय शिबू सोरेन जी को भी सादर नमन करता हूं, जिन्होंने जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता और झारखंड राज्य के निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन संघर्ष को समर्पित किया। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि संघर्ष से ही अधिकार मिलते हैं और विकास तभी सार्थक होता है जब उसमें समाज का अंतिम व्यक्ति सहभागी बने।"


स्वतंत्रता का व्यापक अर्थ
स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी का नाम नहीं है। स्वतंत्रता का अर्थ है कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, हर युवा को सम्मानजनक रोजगार का अवसर मिले, महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, हर किसान समृद्ध हो और हर झारखंडी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा पर गर्व के साथ आगे बढ़े। सभी को समान अवसर, समान सम्मान और न्याय के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले। आज भारत अपनी स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में है और झारखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर एक नए पड़ाव पर खड़ा है। 15 अगस्त केवल इतिहास की एक तिथि नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। हमारे पूर्वजों ने हमें स्वतंत्र भारत दिया और झारखंड के महान जननायकों ने हमें स्वाभिमान, प्रकृति के प्रति सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष की प्रेरणा दी।


विरासत, संस्कृति और झारखंड की पहचान
आज जब हम स्वतंत्रता का उत्सव मना रहे हैं तो सबसे पहले उस विरासत को नमन करना हमारा कर्तव्य है जिसने झारखंड की आत्मा को आकार दिया। हमारे लिए संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शन भी है। जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलित जीवन जीने की जो जीवन दृष्टि हमारे पूर्वजों ने हमें दी, आज पूरा विश्व उसी दिशा में समाधान खोज रहा है और सतत विकास की बात कर रहा है। हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी सभ्यता सदियों से इन्हीं मूल्यों पर आधारित है। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, तिलका मांझी, चांद-भैरव, फूलो-झानो और हमारे महान नायकों ने केवल अन्याय के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि एक ऐसे समाज का सपना देखा जहां सम्मान, समानता, सामुदायिक सहभागिता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जीवन का आधार हो।


अगले 25 वर्षों का झारखंड
हम ऐसा झारखंड बनाना चाहते हैं जहां राज्य का हर युवा आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता में अग्रणी हो। जहां हमारी भाषाएं, साहित्य, लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ी तक सम्मानपूर्वक पहुंच सके। जहां लाख, तसर, बांस, मिलेट, औषधीय पौधे और लघु वनोपज केवल पारंपरिक आजीविका न रहें, बल्कि वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़कर लाखों परिवारों और ग्राम सभाओं की आय का आधार बनें। स्थानीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक मिलकर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करें। हम चाहते हैं कि विकास का अर्थ केवल खनिजों का दोहन नहीं, बल्कि मानव संसाधन, प्राकृतिक संसाधन और सांस्कृतिक विरासत का संतुलित विकास हो। झारखंड केवल भारत का एक राज्य नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना का केंद्र है।


युवाओं के नाम संदेश
मेरे प्यारे युवा साथियों, हमारी विरासत हमें पहचान देती है, लेकिन हमारे युवा उस पहचान को भविष्य देते हैं। यदि हमें अगले 25 वर्षों का झारखंड बनाना है तो उसकी सबसे बड़ी शक्ति हमारे युवा होंगे। आपकी शिक्षा, आपका कौशल, आपका आत्मविश्वास और आपके सपने ही विकसित झारखंड की असली पूंजी हैं। मैं आज इस ऐतिहासिक अवसर पर विशेष रूप से आपसे संवाद करना चाहता हूं। झारखंड के लाखों युवा अपने सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनके माता-पिता अपनी क्षमता से बढ़कर उन्हें पढ़ा रहे हैं। इसलिए यह हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है कि उनकी मेहनत को सम्मान मिले और उनकी प्रतिभा को न्याय मिले।


परीक्षा व्यवस्था और युवाओं का विश्वास
मैं जानता हूं कि पिछले कुछ समय में भर्ती परीक्षाओं को लेकर अनेक प्रश्न उठे हैं। जब परीक्षा व्यवस्था पर संदेह पैदा होता है तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि पूरी पीढ़ी का विश्वास प्रभावित होता है। मैं झारखंड के प्रत्येक विद्यार्थी को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि उसकी मेहनत को किसी भ्रष्ट तंत्र या अनियमितता के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। देश के अनेक राज्यों और राष्ट्रीय परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अन्य गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। यह पूरे देश के सामने एक चुनौती है। लेकिन मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि दूसरे राज्यों में क्या हुआ, उससे झारखंड की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण झारखंड का युवा, उसका भविष्य और उसका विश्वास है।


परीक्षा सुधार और पारदर्शिता
इसलिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि व्यवस्था में परिवर्तन का निर्णय लिया गया है। जांच पूरी निष्पक्षता से होगी। जो भी दोषी होगा, कानून उसके साथ कठोरता से पेश आएगा। वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि उसकी संलिप्तता सिद्ध होती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन बिना प्रमाण के किसी को दोषी ठहराने की राजनीति भी नहीं होगी। न्याय होगा और निष्पक्ष होगा। हमारा लक्ष्य समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित परीक्षा प्रणाली, उत्तर कुंजी और ओएमआर की समयबद्ध उपलब्धता तथा बहुस्तरीय जवाबदेही वाली व्यवस्था विकसित करना है।


रोजगार और अवसर
रोजगार हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। हमारा उद्देश्य केवल रिक्त पद भरना नहीं, बल्कि ऐसा झारखंड बनाना है जहां सरकारी सेवा के साथ-साथ उद्योग, एमएसएमई, कृषि, डेयरी, मत्स्य, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप के क्षेत्रों में भी लाखों नए अवसर तैयार हों। आने वाले समय में जेपीएससी, जेएसएससी तथा अन्य भर्ती एजेंसियों के माध्यम से बड़ी संख्या में नियुक्ति प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाई जाएंगी ताकि युवाओं को अवसर भी मिले और व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत हो।


किसानों के विकास का संकल्प
झारखंड की आत्मा उसके खेतों में बसती है। हमारे किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत नींव हैं।बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत लगभग 2,15,000 एकड़ भूमि में वृक्षारोपण किया गया है और लगभग 3 लाख परिवारों को आजीविका के नए माध्यमों से जोड़ा गया है। उनके द्वारा उत्पादित आमों का विदेशों में भी सफलतापूर्वक निर्यात किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य केवल खेती को सहारा देना नहीं, बल्कि उसे लाभकारी बनाना है। हम चाहते हैं कि झारखंड का किसान केवल धान उत्पादक न रहे, बल्कि कृषि उद्यमी बने।


एमएसएमई, निवेश और औद्योगिक विकास
किसी भी राज्य की आर्थिक शक्ति केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि लाखों छोटे उद्योगों से बनती है। झारखंड के युवा, स्वयं सहायता समूह, कारीगर, बुनकर, महिलाएं, हस्तशिल्पी और छोटे उद्यमी हमारी अर्थव्यवस्था की वास्तविक ताकत हैं। वर्तमान में झारखंड में लगभग 16 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम हैं, जिनमें 8 लाख से अधिक सूक्ष्म इकाइयां शामिल हैं। ये 60 लाख से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए 10 एमओयू हस्ताक्षरित किए गए हैं, जिनसे लगभग 22,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।


महिला सशक्तिकरण
मेरी माताओं, बहनों और बेटियों, किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में हमारी सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की चर्चा पूरे देश में हो रही है। मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना हमारी बहनों और दीदियों के चेहरे पर मुस्कान की गारंटी बन गई है। ₹2500 प्रति माह की नियमित वित्तीय सहायता से महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं और अपनी उद्यमशीलता विकसित करने में सक्षम हुई हैं। सखी मंडलों के माध्यम से 35 लाख परिवारों को जोड़ा जा चुका है। इन्हें चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक क्रेडिट लिंकेज के रूप में हजारों करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है।


स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने का संकल्प
स्वास्थ्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता का आधार है। हमारा उद्देश्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है जो शहर और गांव दोनों के नागरिकों को समान चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करे। राज्य सरकार द्वारा सुपर स्पेशलिटी रिम्स-2 का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और धनबाद में नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण की कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों तक स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है।


विकसित और न्यायपूर्ण झारखंड का संकल्प
मेरे प्यारे झारखंड वासियों, आज जब हम स्वतंत्रता के 80वें वर्ष का उत्सव मना रहे हैं और झारखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर चुका है, तब यह समय केवल उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने का नहीं, बल्कि आने वाले 25 वर्षों की दिशा तय करने का है। हम ऐसा झारखंड बनाना चाहते हैं जहां विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, जहां झारखंड की अस्मिता और आधुनिक प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ें, जहां किसान सम्मान के साथ समृद्ध जीवन जिएं, जहां महिलाएं नेतृत्वकर्ता बनें, जहां हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले और हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो।


अंतिम संदेश
मुझे झारखंड की जनता पर विश्वास है। मुझे अपने किसानों पर विश्वास है। मुझे अपनी माताओं-बहनों पर विश्वास है और सबसे अधिक मुझे अपने युवाओं पर विश्वास है। यही युवा आने वाले झारखंड की नई पहचान लिखेंगे और झारखंड को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। आइए, स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी मिलकर एक संकल्प लें—ऐसा झारखंड बनाएं जो समृद्ध भी हो, संवेदनशील भी हो, आधुनिक भी हो, विकासशील भी हो, न्यायपूर्ण भी हो और अपनी जड़ों से जुड़ा भी रहे। यही हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का सम्मान होगा। यही भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, तिलका मांझी, फूलो-झानो, चांद-भैरव, शेख भिखारी, नीलांबर-पीतांबर, विनोद बिहारी महतो, निर्मल महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन जैसे महान व्यक्तित्वों के संघर्ष को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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