द फॉलोअप डेस्क
पाकुड़ के पूर्व एसपी अमरजीत बलिहार के हत्यारों को फांसी की सजा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी के यहां सुनवाई शुरू हो गयी है। न्यायाधीश चौधरी के यहां अब अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी। गौतम कुमार चौधरी हाईकोर्ट के तीसरे जस्टिस हैं, जिनका सुनवाई के बाद आनेवाला ओपीनियन हत्यारों को लोअर कोर्ट से मिली फांसी की सजा को प्रभावित करेगा। यहां मालूम हो कि पूर्व में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंड पीठ ने दोषी दोनों नक्सलियों सुखलाल उर्फ प्रवीर मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा की अपील पर सुनवाई की थी। इन दोनों ही नक्सलियों ने ठोस सबूत नहीं रहने के बाद भी लोअर कोर्ट द्वारा दी गयी फांसी की सजा को चुनौती दी थी। लेकिन इन दोनों ही न्यायाधीशों का फैसला एक दूसरे के विपरीत आया था। न्यायाधीश संजय प्रसाद ने फांसी की सजा बरकरार रखते हुए नक्सलियों की अपील को खारिज करने की राय दी थी। वहीं न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय ने नक्सलियों को बरी करने की राय दी थी। इसके बाद तीसरे न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी के यहां अब सुनवाई शुरू हुई है। चौधरी की राय उपरोक्त दोनों ही न्यायाधीशों में जिससे मेल खाएगी, वह हाईकोर्ट का अंतिम फैसला माना जाएगा।

उल्लेखनीय है कि चुनाव के दौरान 2013 में पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार एक बैठक में शामिल होने के लिए झारखंड की उप राजधानी दुमका गए थे। वहां से लौटते समय नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में एसपी अमरजीत बलिहार और पांच अन्य पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस मामले की दुमका लोअर कोर्ट में सुनवाई हुई थी। चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की स्पेशल कोर्ट ने दोनों नक्सलियों को फांसी की सजा सुनाई थी। साथ ही संदेह के आधार पर अन्य पांच अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया था। उसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने अमरजीत बलिहार को दो करोड़ का मुआवजा और उनके निकटतम परिजन को क्लास वन ग्रेड की नौकरी देने का आदेश दिया था। इसी तरह योग्यता के आधार पर शहीद पुलिसकर्मियों के निकतम परिजन को नौकरी देने का आदेश दिया था।
