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बालू : खुशीः सात साल बाद रांची डीसी ने किया पहला लीज एग्रीमेंट साइन, दुखः 10 जून से एनजीटी की फिर लग जाएगी रोक

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द फॉलोअप, रांची
झारखंड के लिए खुशी की बात है कि सात साल बाद रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने आज बालू के उठाव के लिए राज्य के पहले लीज एग्रीमेंट को साइन किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार 17 मई तक दुमका, जामताड़ा, जमशेदपुर सहित कुछ अन्य जिलों में भी लीज एग्रीमेंट साइन कर दिया जाएगा। अगले कुछ दिनों में राज्य के 12 जिलों के सभी 35 बालू घाटों के भी लीज एग्रीमेंट कर लिए जाने की संभावना है, जिनसे जुड़े पर्यावरणीय क्लियरेंस और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गयी है। लेकिन दुखद पहलू यह भी है कि 10 जून से राज्य के सभी घाटों से बालू उठाव पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की  रोक लग जाएगी। उसके बाद फिर बालू की किल्लत और कालाबाजारी के बदस्तूर शुरू हो जाने की संभावना बनने लगेगी। क्योंकि लीज एग्रीमेंट के बाद संबंधित बिडर्स को मुश्किल से 15-20 दिन का समय ही बालू उठाव के लिए मिलेगा।


जानिए झारखंड के बालू घाट, संभावित बालू उत्खनन
झारखंड में कुल 444 बालू घाट हैं। इन सभी घाटों से बालू का उठाव होने पर एक साल में अधिकतम तीन करोड़ सीएफटी बालू का उत्खनन किया जा सकता है। अब तक विभिन्न जिलों के 290 बालू घाटों का टेंडर हो चुका है। वैसे विभाग का मानना है कि सभी बालू घाटों की जगह अगर 60-70 फीसदी का भी टेंडर और लीज एग्रीमेंट हो जाने पर लगभग 180-200 करोड़ सीएफटी बालू उत्खनन संभव है। इन 290 घाटों में 35 घाटों का लीज एग्रीमेंट की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए इन्वायरमेंटर क्लियरेंस व अन्य प्रक्रियाएं पूरी कर ली गयी है। 200 करोड़ सीएफटी बालू का उत्खनन होने पर टेंडर में औसतन 15 रुपए सीएफटी (सरकार ने 12.8 रुपए सीएफटी का दर निर्धारित किया है) का दर मिलने पर सरकार को प्रति वर्ष 3000 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो सकता है।


एनजीटी की रोक क्यों
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल का प्रति वर्ष 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू उठाव पर प्रतिबंध रहता है। एनजीटी का यह रोक इसलिए होता है क्योंकि बरसात के दिनों में बालू घाटों पर एक विशेष प्रकार का कीड़ा पनपता है। यह कीड़ा पत्थरों को कुरेदता है और पत्थरों को छोटे छोटे कणों के रूप में बालू का आकार देता है। बरसात में घाटों से बालू का उठाव होने पर उसके नीचे पनपने वाले कीड़े मर जाते हैं और बालू के प्रोडक्शन की मात्रा कम हो जाती है। पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।


विभाग को उम्मीद है कि अब बालू के अवैध उत्खनन पर रोक प्रभावी होगी
खान एवं भू-तत्व विभाग को अब उम्मीद है कि 35 बालू घाटों के बाद शेष बालू घाटों का भी लीज एग्रीमेंट हो जाने पर बालू के अवैध धंधे पर रोक लगेगी। इसके पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। पहला दंड की प्रक्रिया को कड़ा किया जाना। नियमावलियों में कतिपय संशोधन के बाद दंड को काफी कड़ा और पारदर्शी बनाया गया है। पहले अगल अगल जिलों में दंड का प्रावधान अपने अपने तरह से तय कर लिए जाते थे। मसलन किसी जिले में ट्रैक्टर जब्त कर लिया जाता था। कहीं दंड लगाया जाता था। कहीं जेल भेज दिया जाता था। एक ट्रैक्टर (100 सीएफटी) अवैध बालू पकड़े जाने पर 190 रुपए रॉयल्टी की जगह दोगुणा अर्थात 380 रुपए दंड लेकर उसे छोड़ भी दिया जाता था। इस तरह दंडित होने के बाद भी उस अवैध कारोबारी को 1000 का बालू मात्र 380 रुपए में ही प्राप्त हो जाते थे। लेकिन अब अगर एक ट्रैक्टर अवैध बालू पकड़ा गया तो उस पर ट्रैक्टर के फाइन के रूप में 50000 रुपए और बालू की रॉयल्टी का पांच गुणा जमा करना होगा। दंड की यह राशि इतनी अधिक हो जाएगी, जिस कारण बालू के अवैध धंधे पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा नियमानुसार किसी बालू घाट का ठेका देने पर उस घाट के संरक्षण को भी बल मिलेगा। जबकि पिछले सात-आठ सालों से टेंडर नहीं होने के कारण अनियमित और बेतरतीब ढंग से बालू उत्खनन होने से घाटों और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा है। 


अब देखना है, देर आए तो कितना दुरुस्त आए
यहां मालूम हो कि राज्य में पिछले 7-8 सालों से बालू घाटों का नियमानुसार टेंडर नहीं हो सका। इस कारण पूरे राज्य में बालू का अवैध धंधा सिर चढ़ कर बोलता रहा। इसके कई कारण रहे। सरकार की निष्क्रियता के अलावा पेसा नियमावली को लेकर हाईकोर्ट में भी मामला उलझा। हाईकोर्ट ने पेसा नियमावली पर सुनवाई के क्रम में बालू के उठाव पर रोक लगा दिया। यह रोक पेसा नियमावली बनने के बाद 15 जनवरी 2026 को हटायी गयी। उसके बाद बालू घाटों की पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य प्रावधानों को पूरा करने की दिशा में विभाग तेजी से काम करने लगा। इसके लिए नियमावलियों में कतिपय संशोधन भी किए गए। 15 फरवरी तक 35 बालू घाटों की पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गयी। अन्य आवश्यक प्रक्रिया भी पूरी कर ली गयी। इसी बीच उपायुक्तों द्वारा बालू घाटों के टेंडर को लेकर उठायी गयी कुछ आपत्तियों को भी नियमावलियों में संशोधन करके लीज एग्रीमेंट की राह में आनेवाली बाधाएं दूर की गयी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विभाग बालू घाटों के टेंडर करने में देर तो किया, लेकिन वह कितना दुरुस्त होगा।


जेएसएमडीसी के स्टॉक के 10 लाख सीएफटी बालू को बेचने की प्रक्रिया प्रारंभ
यहां मालूम हो कि पहले बालू के उठाव की जिम्मेदारी जेएसएमडीसी को दी गयी थी। उसके लीज की अवधि 15 सितंबर 2025 को ही पूरा हो चुकी थी। लेकिन जेएसएमडीसी द्वारा अपने स्टॉक में जमा किए गए लगभग 10 लाख सीएफटी बालू अभी भी बचे थे। उसे अब विभिन्न जिलों में टेंडर के माध्यम से बेचने की निविदा आमंत्रित की जाने लगी है। इसके लिए अलग अलग प्रमंडलों में उप निदेशक खान की अध्यक्षता में कमेटी का भी गठन किया गया है।

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