गुमला से सुशील कुमार सिंह
गुमला
गुमला जिला मुख्यालय के रांची-गुमला रोड पर स्थित हाट बाजार आज बदहाली और गंदगी की मिसाल बन गया है। यह वही स्थान है, जहां से सरकार को लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन इसके रखरखाव की हालत देखकर कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता है कि यहां व्यवस्था नाम की कोई चीज मौजूद नहीं है।
सप्ताह में दो बार लगने वाला यह बाजार हजारों गरीब परिवारों की रोजी-रोटी का साधन है, लेकिन यहां की दुर्दशा उनके लिए बीमारी और बेबसी का कारण बन चुकी है।
बारिश में कीचड़, गर्मी में दुर्गंध
स्थानीय लोगों ने बताया कि हल्की बारिश के बाद भी बाजार परिसर में घुसना मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और गंदगी से पूरा क्षेत्र लथपथ हो जाता है। ऐसे में बाजार लगाने वाले लोग खुद के पैसे से मिट्टी भरते हैं, ताकि किसी तरह दुकान लगाई जा सके और घर का खर्च चलाया जा सके।
गांव से आए दुकानदार विशाल महतो कहते हैं, "यहां शेड तक ढंग से नहीं है। टैक्स तो लिया जाता है, लेकिन उसके बदले सुविधा कुछ नहीं।"
स्थानीय निवासी विक्की कुमार और अशोक साहू भी बताते हैं कि गुमला नगर परिषद केवल टैक्स वसूली में दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन सफाई या पानी की निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं निभाता।
बीमारी का डर, प्रशासन मौन
दुकानदारों की मानें तो कई लोग तो गंदगी और बीमारी के डर से अब इस बाजार में दुकान लगाना छोड़ चुके हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो मजबूरी में इसी जगह अपने ठेले और दुकान लगाकर परिवार पाल रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि टैक्स हर साल बढ़ता जा रहा है, लेकिन सड़क, जल निकासी या सफाई की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है।
बाजार से निकलने वाले गंदे पानी की कोई निकासी नहीं है। लोग बताते हैं कि बरसात में सड़ांध और बदबू से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे मामले पर न तो नगर परिषद की ओर से कोई जवाब मिलता है, न ही कोई प्रशासनिक पदाधिकारी कुछ बोलने को तैयार है।