द फॉलोअप डेस्क
14 साल की शिवानी लोहरा ने दम तोड़ दिया क्योंकि सरकारी एंबुलेंस धक्का लगाने के बाद भी स्टार्ट नहीं हो सका। शिवानी तीन घंटे तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ती रही लेकिन स्वास्थ्य महकमा उसे उसकी सांसें वापस दिलाने में नाकाम रहा। शिवानी को वक्त पर एंबुलेंस तो नहीं ही मिला ना तो डॉक्टर उसका इलाज करने आए और ना ही उसे सही वक्त पर ऑक्सीजन ही मिल पाया। ये हालत तब है जबकि पिछले महीने प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वास्थ्य महकमे में खराब एंबुलेंस को लेकर बेहद नाराजगी जाहिर की थी। और विभागीय मंत्री की मौजूदगी में इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। हालांकि ऐसा लगता है कि दर्जनों मौत और चीखों के बावजूद स्वास्थ्य महकमें के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। जिम्मेदारी जवाबदेही और दायित्व से मुंह चुराने का इससे शर्मनाक उदाहरण और कहीं नहीं मिलता है। दरअसल गुमला जिले के चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। चैनपुर के प्रेमनगर निवासी 14 वर्षीय शिवानी कुमारी लोहरा की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद करीब तीन घंटे तक बच्ची अस्पताल परिसर में बेहोश पड़ी रही, लेकिन न तो कोई डॉक्टर उसे देखने आया और न ही समय पर उसे रेफर करने की व्यवस्था की गई।

नहीं मिली समय पर एंबुलेंस, ना ऑक्सीजन
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल परिसर में सरकारी एम्बुलेंस तो खड़ी थी, लेकिन वह खराब पड़ी थी। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आधा दर्जन से अधिक लोग मिलकर एम्बुलेंस को धक्का देकर स्टार्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन काफी मशक्कत के बाद भी वाहन चालू नहीं हो सका। आरोप है कि बच्ची की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल में ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं कराई गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल में इस तरह की लापरवाही कोई नई बात नहीं है। उनका आरोप है कि डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे और एम्बुलेंस की सुविधा भी नहीं मिल सकी। मजबूरी में परिजनों ने एक निजी पिकअप वैन रिजर्व की। बेहद दर्दनाक हालात में बच्ची को वाहन की केबिन में उसकी मां राजमुनी और अन्य परिजनों की गोद में लिटाकर गुमला सदर अस्पताल ले जाया गया। रास्ते भर बच्ची उल्टियां करती रही और उसके हाथ-पैर अकड़ते रहे।

रांची पहुंचने से पहले मौत
गुमला सदर अस्पताल पहुंचने के बाद भी बच्ची को बेहतर इलाज नहीं मिल सका। वहां से चिकित्सकों ने उसे रांची रेफर कर दिया। परिजन अपनी मासूम बेटी की जान बचाने की उम्मीद में उसे लेकर रांची के लिए निकले, लेकिन गुमला शहर से बाहर निकलने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही का भी संकेत है।