द फॉलोअप डेस्क
पिछले 23 दिनों से डोरंडा स्थित राजकीय मुद्रणालय में नाम और पता परिवर्तन संबंधी गजट प्रकाशन बाधित है। प्रतिदिन दर्जनों राज्य भर के जरुरतमंद मुद्रणालय आते हैं। वहां गजट प्रकाशन के लिए इंतजार कर लौट जाते हैं। गजट प्रकाशन नहीं हो रहा है। गजट प्रकाशन संबंधी लगभग 500 से अधिक आवेदन लंबित हो गए हैं। गजट प्रकाशन नहीं होने के कारण किसी के सर्टिफिकेट में सुधार नहीं हो रहा है तो किसी कंपनी का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है।

इसका मूल कारण यह है कि राजकीय मुद्रणालय में गजट प्रकाशन का काम देखनेवाले वित्त विभाग के अकेले प्रशाखा पदाधिकारी संतोष मस्ताना को सीआईडी ने 29 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया था। सीजीएल प्रश्न पत्र लीक प्रकरण में मस्ताना को सीआईडी ने हिरासत में लिया था। मस्ताना के हिरासत में लिए जाने के बाद सीआईडी ने लगभग 20 दिन तक इसकी सूचना सरकार को नहीं दी। वित्त विभाग को आधिकारिक रूप से यह जानकारी नहीं मिल सकी कि उनका प्रशाखा पदाधिकारी कहां है। इस वजह से वित्त विभाग न तो संतोष कुमार मस्ताना को निलंबित कर पा रहा था और ना ही उसकी जगह किसी दूसरे प्रशाखा पदाधिकारी की पोस्टिंग हो पा रही थी।

अब आधिकारिक जानकारी के अनुसार सीआईडी ने वित्त विभाग को संतोष मस्ताना की गिरफ्तारी की सूचना दे दी है। इसके बाद वित्त विभाग पहले संतोष मस्ताना की सेवा वापस लेते हुए निलंबन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। उनकी जगह किसी दूसरे प्रशाखा पदाधिकारी की पोस्टिंग की उम्मीद बढ़ी है। लेकिन लेट लतीफी की वजह से इसमें और विलंब होने से इंकार नहीं किया जा रहा है। इस कारण आम लोगों को अभी और मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।
