द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में राज्यसभा के दो सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में पक्ष और विपक्ष की ओर से कई नामों की चर्चा तेज है लेकिन इन सब के बीच सबसे पहले कांग्रेस ने एक सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा गुरुवार रात ही कर दी। बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली दरबार से संगठन में मजबूती से काम करने वाले प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। प्रणव झा मूलतः बिहार के रहने वाले हैं। उनके नाम की घोषणा होते ही तमाम कयासों पर पूर्ण विराम लग गया। गौरतलब हो कि झारखंड कांग्रेस से कई बड़े चेहरों के नाम की चर्चा तेज थी और इनमें एक नाम झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद फुरकान अंसारी की भी चल रही थी। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनके नाम पर सहमती नहीं जताई। जिसके बाद पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी के हालिया निर्णय से उन्हें गहरी चोट पहुँची है। इस उम्र में उन्हें उपेक्षित महसूस करना बेहद कष्टदायक लग रहा है।

संघर्ष और योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया
अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फुरकान अंसारी लिखते हैं कि पूरी ज़िंदगी कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने, संगठन को सींचने और समाज को जोड़ने में लगा दी। संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक पार्टी के लिए हर परिस्थिति में खड़ा रहा। कभी पद की चिंता नहीं की, केवल संगठन और विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम किया। लेकिन हालिया निर्णय से मुझे गहरी चोट पहुँची है। दुख इस बात का नहीं कि कोई पद नहीं मिला, बल्कि पीड़ा इस बात की है कि दशकों के समर्पण, संघर्ष और योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया। जिस उम्र में सम्मान और अनुभव का आदर होना चाहिए, उस उम्र में स्वयं को उपेक्षित महसूस करना बेहद कष्टदायक है। फिर भी मैं पार्टी का सिपाही हूँ और रहूँगा। मेरा विश्वास है कि पार्टी नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की भावनाओं का सम्मान करेगा। संगठन तभी मजबूत होता है जब संघर्ष करने वालों की आवाज सुनी जाए और उनके आत्मसम्मान का ख्याल रखा जाए। मेरी पीड़ा व्यक्तिगत नहीं, उन हजारों कार्यकर्ताओं की भावना है जिन्होंने अपना जीवन पार्टी के लिए समर्पित कर दिया। उम्मीद है कि भविष्य में निर्णय लेते समय जमीनी हकीकत, कार्यकर्ताओं की भावनाओं और वर्षों के योगदान को उचित महत्व दिया जाएगा।
