जमशेदपुर
जमशेदपुर में 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनवॉइस बिलिंग घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) की जमशेदपुर टीम ने बारीडीह निवासी स्क्रैप कारोबारी अजय कुमार शर्मा उर्फ अजय शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी कंपनियों के जरिए 20.26 करोड़ रुपये का अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। मामले में कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं, जबकि जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
फर्जी कंपनियों के नाम पर तैयार किया बिलिंग
जांच में सामने आया है कि अजय शर्मा ने कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से फर्जी बिलिंग का नेटवर्क तैयार किया था। इनमें मेसर्स श्री गणेश ट्रेडिंग, मेसर्स क्वीन मेटालिक प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स गोविंदार्थ ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कालो मानुकॉन प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य फर्म शामिल हैं। इन कंपनियों का गठन कथित तौर पर सिर्फ कागजों पर लेन-देन दिखाने और फर्जी इनवॉइस जारी करने के लिए किया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन फर्मों के जरिए करीब 8.05 करोड़ रुपये के अवैध आईटीसी का लाभ लिया गया। 
12.21 करोड़ रुपये के आईटीसी का भी खुलासा
जांच के दौरान मेसर्स क्रांतिक ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय लेन-देन की भी जांच की गई। इसमें पता चला कि वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान कंपनी ने 12,21,70,536 रुपये के अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। DGGI की जांच में सामने आया कि अजय शर्मा इस कंपनी के प्रमुख लाभार्थियों और संचालकों में शामिल था। कंपनी के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जुड़े दस्तावेजों की जांच में उसकी भूमिका स्पष्ट हुई। 
कोलकाता से हुई थी मामले की शुरुआत
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कोलकाता से गिरफ्तार किए गए मास्टरमाइंड शिव कुमार देवड़ा की गिरफ्तारी के बाद हुआ। देवड़ा के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान DGGI को कई संदिग्ध दस्तावेज और फर्जी कागजात मिले थे। इन्हीं दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच एजेंसी अजय शर्मा तक पहुंची। DGGI की टीम ने अजय शर्मा को हिरासत में लेकर साकची स्थित कार्यालय में पूछताछ की। पूछताछ के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसका मेडिकल कराया गया।जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी कंपनियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।