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प्रथम वरीयता का अधिक वोट लानेवाला उम्मीदवार भी द्वितीय वरीयता का कम मत मिलने पर हार जाता है

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जीतेंद्र कुमार
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इस चुनाव में दो से अधिक, 3 या 4 उम्मीदवार होने की संभावना बनने लगी है। यह स्पष्ट है कि दो सीटों के लिए अगर दो ही उम्मीदवार हुए तो वोटिंग नहीं होगी। दोनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे। लेकिन उम्मीदवारों की संख्या अगर दो से अधिक होती है तो मतगणना की प्रक्रिया बेहद पेंचीदी हो जाती है। मतगणना की इस पद्धति में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वरीयता का मत देने का प्रावधान है। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वरीयता के मतों का वैल्यू अलग होता है, जो मतगणना को प्रभावित करती है।


जब दो उम्मीदवार हुए
राज्यसभा की दो सीटों के लिए अगर दो ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में खड़े हुए तो मतदान नहीं कराया जाता। दोनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।


जीत के लिए मतगणना का सामान्य फार्मूला
विधायकों की संख्या 81 है और सीट दो है तो मतगणना कुछ इस प्रकार होती है। कुल विधायकों (81) की संख्या को रिक्त सीट प्लस वन से भाग दिया जाता है और भागफल में एक जोड़ दिया जाता है। अर्थात 81 को तीन से भाग देने के बाद प्राप्त संख्या 27 में एक जोड़ दिया जाता है। इस तरह प्रथम वरीयता का 28 वोट लानेवाले को विजयी घोषित किया जाता है। लेकिन उम्मीदवारों की संख्या अगर 3 हो जाती है तो मतगणना की पद्धति बदलने लगती है। उदाहरण के रूप में तीन उम्मीदवारों में पहले को प्रथम वरीयता का 30 मत प्राप्त हो गए। उस स्थिति में प्रत्येक मत का वैल्यू 100 रखा जाता है। इस तरह इस उम्मीदवार को मिले मतों का वैल्यू 3000 हो जाएगा। तब उसे जीतने के लिए 2700 प्लस 1 अर्थात 2701 मत की जरूरत होती है। इस तरह उसे 2701 मत के आधार पर विजयी घोषित कर दिया जाता है। लेकिन उसे प्राप्त (3000-2701) 299 मतों का बंटवारा अन्य दो या तीन उम्मीदवारों के बीच किया जाता है। अब यह देखा जाता है कि पहले उम्मीदवार को प्राप्त 30मतों में कितने विधायकों ने दूसरी वरीयता का मत भी दिया है। उदाहरण के रूप में अगर पांच विधायकों ने दूसरी वरीयता का मत दिया है तो 299 अतिरिक्त मतों को पांच से भाग देकर मत का वैल्यू निकाला जाता है, जो उदाहरण के रूप में 59.8 होगा। फिर यह देखा जाएगा कि पांच विधायकों ने किसको किसको द्वितीय वरीयता का मत दिया है। अगर उम्मीदवार तीन हैं, ए, बी और सी। ए जीत चुका है। अब पांच विधायकों में दो ने बी को और तीन ने सी को द्वितीय वरीयता का मत दिया है। बी को पहले से 22 विधायकों का मत प्राप्त हो चुका है तो उसके कुल मतों का वैल्यू 2200 है। अब उसके पहले उम्मीदवार ए को मिले अतिरिक्त मतों में भी हिस्सेदारी मिलेगी। उस मत का वैल्यू 2 गुणा 59.8,अर्थात 119.6 होगा। इस तरह बी का कुल मत 2200 प्लस 119.6 अर्थात 2319.6 हो जाएगा। सी को अगर पहले से 21 मत जिसका वैल्यू 2100 है, उसमें 3 गुणा 59.8 गुणा अर्थात 179.4 वोट वैल्यू जुड़ जाएगा। सी का कुल मत 2279.4 हो जाएगा। इस तरह सी द्वितीय वरीयता का तीन मत प्राप्त करने के बाद भी पराजित हो जाएगा।


जब चार उम्मीदवार हो
अगर डी रुपी चौथा उम्मीदवार है तो। सबसे कम मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार मतगणना से इलिमिनेट कर दिया जाता है। लेकिन चौथे उम्मीदवार को भी 6 मत प्राप्त हुए हैं जिसका वैल्यू 600 होगा। एक मत का वैल्यू 100 होगा। अब 600 अंक ( वोट वैल्यू) का बंटवारा इस प्रकार होगा। छह विधायकों में दो ने बी को और चार ने सी को द्वितीय वरीयता का मत दिया है। उस स्थिति में बी का कुल मत 2319.6 प्लस 200 अर्थात 2519.6 हो जाएगा। वहीं सी का वोट वैल्यू 2279.4 प्लस 400 अर्थात 2679.4 हो जाएगा। इस तरह मतगणना में जीत उम्मीदवार ए और सी की हो जाएगी।


 

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