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अनियमित वर्षा, अत्यधिक गर्मी और आजीविका पर बढ़ता इसका दबाव हमारी मुख्य चुनौतियांः स्पीकर

अनियमित वर्षा, अत्यधिक गर्मी और आजीविका पर बढ़ता इसका दबाव हमारी मुख्य चुनौतियांः स्पीकर

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि जलवायु अनुकूलन को केवल पर्यावरण नीति का विषय नहीं, बल्कि विकास, जनसुरक्षा और आजीविका की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम मानना चाहिए। अनियमित वर्षा, जल स्रोतों का शीघ्र सूखना, अत्यधिक गर्मी तथा कृषि और आजीविका पर बढ़ता दबाव आज हमारी प्रमुख चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने क्लाइमेट जस्टिस को ध्यान में रखते हुए और CBDR (Common But Differentiated Responsibilities) के सिद्धांतों को महत्व दिया है। अनुकूलन और जलवायु सहनशीलता के लिए घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण निवेश किया है जो  21-22 वर्षों में  देश की GDP का 5.6% था। भारत के नए NDC के तहत 2035 तक 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता में 47 प्रतिशत कमी,60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता और 3.5–4.0 अरब टन CO₂e अतिरिक्त कार्बन सिंक का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। वह केपटाउन में 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन में Parliamentary Leadership in Climate Adaptation and Resilience विषय पर बोल रहे थे।


अध्यक्ष ने जोर दिया कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए आज बनाए जा रहे सड़क, स्कूल, अस्पताल और जल प्रणालियों को टिकाऊ बनाया जाना चाहिए। जलवायु संबंधी निर्णयों में किसान, वैज्ञानिक, आदिवासी समुदाय, महिलाएँ, श्रमिक, युवा और दिव्यांगजन की प्रभावी भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। बाढ़ और सूखे के बाद केवल राहत पर निर्भर रहने की बजाय, पूर्व तैयारी, जल संरक्षण, वाटरशेड विकास और वर्षा जल संचयन को मजबूत करने जोर देना चाहिए। लू के प्रभावों से बचाव हेतु पूर्व चेतावनी प्रणाली जैसे उपाय तथा स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी जरूरी है।


झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश  वन, जल, कृषि, खनिज, खनन और आदिवासी समुदायों की आजीविका गहराई से जुड़ी हुई है।इसलिए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जलवायु अनुकूलन रणनीति विकसित करना आवश्यक है। संसद इसे कानून, बजट, जांच-परख और प्रतिनिधित्व के माध्यम से इसे और अधिक सशक्त बना सकती है। उनके व्याख्यान का मूल भाव था, सहनशीलता (Resilience) विकास में बाधा नहीं, बल्कि बेहतर और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। हमारी संसदें केवल बहस के सदन नहीं, बल्कि तैयारी के सदन बनें।

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