द फॉलोअप डेस्क
झारखंड हाईकोर्ट में कल हुई सुनवाई के बाद राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने मुख्य सचिव और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख कर राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नति के मामले में एक पत्र लिखा है। उस पत्र में महाधिवक्ता ने कहा है कि हाईकोर्ट ने याचिका (डब्ल्यूपीएस 2565-25) पर सुनवाई के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में प्रमोशन के लिए यूपीएससी को रिक्ति के तीन गुणा नाम भेजने पर कोई स्टे नहीं लगाया है। इसलिए राज्य सरकार को यूपीएससी को तीन गुणा अधिकारियों का नाम भेजने में कोई वैधानिक समस्या नहीं है। यहां मालूम हो कि राज्य प्रशासनिक सेवा से इस वर्ष 19 अधिकारियों का आईएएस में प्रमोशन होना है। इसके लिए नियमानुसार राज्य सरकार को तीन गुणा अधिकारियों का नाम यूपीएससी को भेजे जाने का प्रावधान है। लेकिन यूपीएससी को नाम भेजे जाने के क्रम में विवाद तब खड़ा हुआ जब बिहार से अपनी इच्छानुसार झारखंड की सेवा में आए राधेश्याम प्रसाद ने वरीयता सूची को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

बिहार पुनर्गठन विधेयक 2000 के अनुसार अपनी इच्छा से बिहार से झारखंड आनेवाले सरकारी कर्मियों को वरीयता सूची में नीचे रखने का प्रावधान किया गया है। इस कारण राधेश्याम प्रसाद को वरीयता सूची में नाम नीचे हो गया। इससे उनका नाम यूपीएससी को भेजी जानेवाली सूची में शामिल नहीं हो सका। इसको लेकर वह हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इससे यूपीएससी को भेजी जानेवाली सूची का मामला उलझ गया। इसके बाद बीपीएससी के 39 एवं 40 बैच के अधिकारियों ने इंटर लोकेट्री पेटीशन दायर किया। हाईकोर्ट से आग्रह किया कि इस विवाद में वे क्यों प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद 10 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सूची भेजने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि कार्मिक विभाग ने यूपीएससी को सूची भेज दी है। लेकिन विवाद के कारण उस पर कोई अग्रेत्तर कार्रवाई नहीं हो रही है। इसलिए अब हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद महाधिवक्ता ने राज्य सरकार को स्पष्ट किया है कि तीन गुणा सूची भेजने में हाईकोर्ट की कहीं कोई रोक नहीं। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि यूपीएससी जल्द प्रोन्नति संबंधी बैठक बुला कर योग्य उम्मीदवारों को आईएएस में प्रमोशन पर मुहर लगा देगा।

यहां मालूम हो कि देश के 18 राज्यों के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों (एससीएस) को रिक्ति के विरुद्ध भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में प्रोन्नति मिल चुकी है। केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने आईएएस में प्रोन्नति संबंधी अधिसूचना जारी कर चुका है। गुजरात जैसे राज्यों के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को फरवरी 2025 में ही प्रोन्नति मिल चुकी है। लेकिन दुर्भाग्यजनक स्थिति यह है कि आईएएस में प्रोन्नति पानेवाले झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का पैनल भी अभी तक यूपीएससी को नहीं भेजा गया है। यहां मालूम हो कि झारखंड से वर्ष 2024 में झाप्रसे से आईएएस में प्रोन्नति के लिए कुल 19 रिक्तियां हैं। अर्थात राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारी आईएएस में प्रोन्नत होंगे। विशेष परिस्थिति को छोड़ कर तय मानदंड के अनुसार एक जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रोन्नति पर अंतिम निर्णय ले लिए जाने का प्रावधान है। लेकिन अब तक 19 रिक्तियों के विरुद्ध 57 अधिकारियों का पैनल ही नहीं भेजा गया है।
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किस राज्य के अधिकारी को कब मिली आईएएस में प्रोन्नति
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक लगभग 18 राज्यों के अधिकारियों को आईएएस में प्रोन्नति दी जा चुकी है।
गुजरात-20 फरवरी 2025
केरल--26 मार्च 2025
पश्चिम बंगाल-21 मार्च 2025
उड़ीसा-01 अप्रैल 2025
हिमाचल प्रदेश-23 मई 2025
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