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MMDR संशोधन विधेयक-2026 संघीय ढांचे पर केंद्र सरकार का सीधा आर्थिक प्रहार- दीपिका पांडेय सिंह

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द फॉलोअप डेस्क, रांची:

केंद्र सरकार ने संसद में MMDR संशोधन विधेयक 2026 पास करके, खनिज संसाधनों पर सेस लगाने का राज्यों का अधिकार समाप्त कर दिया है। झारखंड, देश को कुल खनिज संसाधनों का करीब 45% हिस्सा अकेले मुहैया कराता है। प्रदेश की ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस बिल को संघीय ढांचे पर केंद्र सरकार का सीधा आर्थिक प्रहार बताया है। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि इस फैसले से झारखंड को सेस के रूप में मिलने वाले करीब 14-16 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। यही राशि राज्य सरकार आबुआ आवास, सर्वजन पेंशन और मईयां सम्मान जैसी जन-कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च कर रही है। 

राज्यों को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की साजिश!
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ राजस्व का सवाल नहीं है, बल्कि झारखंड के हक और करोड़ों लाभुकों के अधिकार का सवाल है। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार इस बिल के जरिये राज्यों को आर्थिक रूप से पंगु बनाना चाहती है। हमारी बहुत सारी जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। दीपिका पांडेय सिंह ने केवल झामुमो, कांग्रेस या दूसरी पार्टियां ही नहीं, बल्कि बीजेपी शासित वे राज्य भी प्रभावित होंगे जो खनिज संसाधनों से सेस वसूलते हैं। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह बीजेपी शासित उन राज्यों के लिए भी झटका है और उम्मीद है कि उनकी भी इस बिल से असहमति होगी। 

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड ये बर्दाश्त नहीं करेगा। आंदोलन झारखंड की पहचान है और हम सड़क, संसद और कोर्ट में लड़ाई लड़ेंगे और झारखंड का हक लेकर रहेंगे। 

 

सीएम हेमंत ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है
गौरतलब है कि इस बिल को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बिल के जरिये झारखंड को प्रतिवर्ष करीब 14000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। झारखंड, जो पहले ही आर्थिक चुनौती से जूझ रहा है, वह यदि अपने खनिज संसाधनों पर सेस नहीं वसूल पाएगा तो विकट स्थिति पैदा हो जाएगी। उन्होंने झारखंड के नागरिकों को भी आंदोलन के लिए तैयार रहने को कहा है। 


 

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