द फॉलोअप डेस्क
बिहार-झारखंड की सीमा पर आतंक का पर्याय बन चुका 50 हजार रुपये का इनामी कुख्यात अपराधी दानिश इकबाल आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। यह गिरफ्तारी रविवार देर रात हजारीबाग के नगवा एयरपोर्ट क्षेत्र से हुई, जब पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर इलाके की घेराबंदी की। लगभग दो बजे रात को हुई इस कार्रवाई में दानिश को भागने का मौका नहीं मिला और उसे मौके पर ही पकड़ लिया गया। दानिश पर हत्या, लूट, फिरौती, गोलीबारी और बमबारी जैसे दर्जनों संगीन आरोप हैं।
पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि दानिश अपने गिरोह के साथ नगवा टोल प्लाजा के पास देखा गया है। इसके बाद लोहसिंघना थाना प्रभारी ने तुरंत सशस्त्र बलों के साथ इलाके की घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही एक युवक भागने लगा, लेकिन पुलिस की सटीक रणनीति के चलते वह ज्यादा दूर नहीं जा सका। पकड़े गए युवक ने खुद को मो. दानिश इकबाल, उम्र 23 वर्ष, निवासी रमना मोहल्ला, थाना शेरघाटी, जिला गया (बिहार) बताया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दानिश के पास से चार मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, एक राउटर, फर्जी आधार और पैन कार्ड, एक नोटबुक और पहचान छिपाने के लिए बनाए गए तीन अलग-अलग दस्तावेज़ बरामद किए हैं। थाने में पूछताछ के दौरान दानिश ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। उसने बताया कि वह उत्तम यादव, शक्ति गिरी उर्फ साईको टाइगर और फोटो खान जैसे कुख्यात अपराधियों के साथ मिलकर संगठित अपराधों को अंजाम देता रहा है।
दानिश ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि दिसंबर 2024 में हजारीबाग में उदय साव की हत्या, गया जिले के आमस थाना क्षेत्र में अनवर अली की हत्या, गुरुआ में भारत माला प्रोजेक्ट पर फायरिंग और 4 जनवरी 2025 को गया शहर में डॉक्टर तपेश्वर प्रसाद के क्लिनिक पर बमबारी जैसे गंभीर अपराध उसी के गिरोह ने किए थे। उसके खिलाफ झारखंड और बिहार के अलग-अलग थानों में 8 से अधिक केस दर्ज हैं, जिनमें लोहसिंघना थाना कांड संख्या 216/24, आमस थाना 341/23, गुरुआ थाना 271/24 और शेरघाटी थाना के कई मामले शामिल हैं। इन मामलों में हत्या, विस्फोटक अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और बीएनएस की धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दानिश से पूछताछ के बाद उसके नेटवर्क और गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस अब उन सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है जो अभी फरार हैं। दानिश की गिरफ्तारी को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि यह गिरोह पिछले दो वर्षों से बिहार-झारखंड की सीमा पर दहशत फैला रहा था।
वहीं दूसरी ओर, इस गिरफ्तारी से पहले दानिश के परिजन ने पुलिस मुख्यालय में जाकर DGP से मुलाकात की थी। दानिश के भाई ने मीडिया के सामने दावा किया था कि उसका एनकाउंटर उत्तम यादव की मौत वाले दिन ही हो गया था। उन्होंने प्रशासन से दानिश का शव मांगा था। उस समय पूरा परिवार पुलिस के ऑपरेशन से डरा हुआ था और लगातार दबाव में था। अब जबकि दानिश को हजारीबाग पुलिस ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, परिजनों ने राहत की सांस ली है। दानिश की गिरफ्तारी से पुलिस को उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी और आने वाले दिनों में गिरोह के अन्य सदस्यों पर शिकंजा कसने की उम्मीद है। यह गिरफ्तारी झारखंड पुलिस की सक्रियता और खुफिया तंत्र की मजबूती का परिणाम है।
