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MBBS : सीआईडी जांच शुरू होने से पूर्व ही रिक्त सीटों को भरने के लिए काउंसिलिंग प्रारंभ

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जीतेंद्र कुमार
झारखंड के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के नामांकन में हुई भारी गड़बड़ी की जांच से पूर्व ही स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर फिर से स्ट्रे वैकेंसी राउंड काउंसिलिंग प्रारंभ कर दी गयी है। 28 नवंबर से 30 नवंबर तक च्वॉयस फिलिंग, एक दिसंबर से छह दिसंबर तक प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट और 2 दिसंबर से 6 दिसंबर तक सर्टिफिकेट और अन्य प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। एमबीबीएस के वर्तमान सत्र के लिए नामांकन की इस प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी के बाद पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने अंतर विभागीय कमेटी और सीआईडी से जांच कराने के आदेश दिए थे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार सीआईडी जांच प्रारंभ होने से पहले ही तीसरे चरण की काउंसिलिंग (स्ट्रे वैकेंसी राउंड काउंसिलिंग) प्रारंभ कर दी गयी है। जबकि जानकारों के अनुसार नामांकन में भारी गड़बड़ी और घोटाले की बात सामने आयी है। पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज (MMC) के अधिकारियों ने पिछले दिनों 2025 बैच के एमबीबीएस कोर्स में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर हुए दो दाखिलों को रद्द कर दिया था। इसी तरह गोड्डा जिले के एक एमबीबीएस उम्मीदवार को धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में आरक्षित कोटे के तहत दाखिले का दावा करने के लिए जाली जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करते हुए पकड़ा गया था।

जेसीईसीईबी ने नहीं बनाया एनटीए डाटा को आधार
एमबीबीएस की यूजी और पीजी कोर्स के नामांकन में पिछले कई वर्षों से बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आयी है। जानकार सूत्रों के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के लिए नीट की परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्ट एजेंसी (एनटीए) करती है। एनटीए के डाटा के आधार पर 15 फीसदी सीट ऑल इंडिया कोटे का और 85 फीसदी सीटें राज्य सरकारों के कोटे की होती है। झारखंड को काउंसिलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व एनटीए के डाटा को ही आधार बनाने का प्रावधान है। क्योंकि मेडिकल काउसिलिंग कमेटी(एमसीसी) भी ऑल इंडिया कोटे की सीटों के लिए एनटीए के ही डाटा का उपयोग करती है। लेकिन झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (जेसीईसीईबी) ने झारखंड में मेडिकल कॉलेजों के यूजी और पीजी कोर्स में काउंसिलिंग के लिए एनटीए के डाटा का सही सही इस्तेमाल नहीं किया है। और यह गड़बड़ी और घोटाला पिछले कई वर्षों से जारी है। सूत्रों के अनुसार फर्जी दस्तावेज पर नामांकन का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से इसकी सीआईडी जांच कराने का आदेश दिया।  क्योंकि मध्य प्रदेश में हुए व्यापम घोटाले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।  यूजी और पीजी कोर्स की रिक्त सीटों पर नामांकन के लिए तीसरे चरण की होनेवाली काउंसिलिंग को भी स्थगित कर दिया गया। जबकि जानकार सूत्रों का कहना है कि पहले और दूसरे चरण की काउंसिलिंग के माध्यम से हुए नामांकन में भी भारी अनियमितता और घोटाले हुए हैं।

अबु इमरान की अध्यक्षता वाली कमेटी ने गड़बड़ी पायी
जनकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अबु इमरान की अध्यक्षता वाली कमेटी ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए हुई काउंसिलिंग में गड़बड़ी पायी है। कमेटी ने पाया है कि जेसीईसीईबी ने काउंसिलिंग के लिए तय मानदंड का सही सही इस्तेमाल नहीं किया है। कमेटी ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट भी दी है।


 

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