द फॉलोअप, रांची
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड सदर अस्पताल पलामू में बनने वाले तीन मॉड्यूलर OT निर्माण का विवादित टेंडर रद्द कर दिया गया है। भवन निर्माण प्रमंडल डालटेनगंज के कार्यपालक अभियंता ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है। मालूम हो कि द फॉलोअप ने इस टेंडर में बरती गयी अनियमितताओं को लेकर विस्तार से खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद टेंडर में बरती गयी अनियमितताओं को लेकर भवन निर्माण विभाग ने कड़ा एक्शन भी लिया था। छुट्टी के दिन 13 अगस्त को विभाग के विशेष सचिव विधानचंद्र चौधरी ने भवन निर्माण प्रमंडल डालटेनगंज के कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम को शोकॉज जारी किया। साथ ही कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम को 48 घंटे के भीतर शोकॉज का जवाब देने का भी आदेश दिया था। सूत्रों के अनुसार महेंद्र राम ने विभाग को शोकॉज का जवाब भी दिया। उसमें उन्होंने शीर्ष अधिकारी के मौखिक आदेश पर ऑफ लाइन टेंडर निकालने की बात कही। लेकिन उनके जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ। टेंडर को रद्द करने का निर्देश दिया गया। हालांकि यह अलग जांच का विषय है कि भवन निर्माण विभाग में क्या मौखिक आदेश पर भी टेंडर की शर्तों को बदला जा सकता है।
कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम को जारी शोकॉज में कहा गया था कि प्रति यूनिट 70.41 लाख रुपए की लागत से, कुल 2.11 करोड़ रुपए से बनने वाले मॉड्युलर ओटी का ऑफ लाइन टेंडर कैसे निकाला गया। जबकि भवन निर्माण विभाग के आदेश संख्या 2163, दिनांक 19 नवंबर 2000 के माध्यम से 50 लाख रुपए से अधिक का टेंडर ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के तहत निष्पादित किया जाना है। पत्र में आगे कहा गया है कि यह योजना भवन निर्माण विभाग से स्वीकृत या संबंधित नहीं है। जिला स्तर पर इस योजना के क्रियान्वयन हेतु आपको कार्य एजेंसी बनाया गया है। आपकी सेवा भवन निर्माण विभाग के अधीन है एवं आपको विभाग द्वारा कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल डालटेनगंज के पद पर पदस्थापित किया गया है। इसलिए भवन निर्माण विभाग के सभी नियम अप्रत्यक्ष रूप से जिला स्तर पर स्वीकृत योजनाओं के क्रियान्वयन में लागू होंगे। इसके बाद भी आपके द्वारा विभागीय आदेश आदेश संख्या 2163, दिनांक 19 नवंबर 2000 की अनदेखी करते हुए ऑफ लाइन निविदा आमंत्रित की गयी। आपका यह कृत्य लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है। इससे विभाग की भी छवि धूमिल हुई है। इसलिए 48 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करें कि क्यों नहीं आपके विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाए।
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