द फॉलोअप, रांची
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू द्वारा राजद और माले पर राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के लगाए गए आरोप के बाद प्रदेश कांग्रेस आज बैकफुट पर दिखी। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को सभी विधायकों के साथ प्रेस कंफ्रेस कर सफाई देनी पड़ी। यह झारखंड के इतिहास की पहली घटना रही, जिसमें पूरे विधायक दल के साथ किसी पार्टी को प्रेस कंफ्रेस कर सफाई देनी पड़ी है। हालांकि इस प्रेस कंफ्रेस में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, विधायक अनूप सिंह, नमन विक्सल कोंगारी और निशात आलम व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सकी। प्रेस कंफ्रेस में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए जो कहा, उसका आशय था- राजद और माले द्वारा कांग्रेस प्रभारी एवं विधायकों पर लगाए जा रहे आरोप निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने पूरी एकजुटता, अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन बिना किसी तथ्य और प्रमाण के कांग्रेस विधायकों की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि चुनाव मे पैसे का खेल हुआ। भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को छह अतिरिक्त वोट कहां से आए। हालांकि उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के साथ विश्वासघात और धोखा होने का आरोप भी चस्पा किया। उन्होंने कहा कि हार का विश्लेषण किया जा रहा है। के राजू एक ईमानदार और सफल राजनीतिज्ञ हैं। इससे महागठबंधन और मुख्यमंत्री को भी नुकसान पहुंचा है। बावजूद इसके सहयोगी दलों को सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए। प्रदीप यादव ने भी कहा कि के राजू पर उंगली नहीं उठाया जा सकता। चूक हुई है और अब चूक पर चर्चा नहीं चिंता की जानी चाहिए। राधाकृष्ण किशोर ने भी कहा कि हमारे 56 विधायक थे। दोनों सीटें जीतनी चाहिए थी। यह कांग्रेस नहीं महागठबंधन की हार है। लेकिन राज्यसभा की एक सीट पर हार का मतलब हम झारखंड नहीं हारे हैं। कोई भी कप्तान परिणाम देखने के बाद भावावेश में बोल जाता है, इसी रूप में के राजू के बयान को देखा जाना चाहिए। वह एक कुशल और ईमानदार राजनेता हैं। हार से पीड़ा होती है, लेकिन अमर्यादित बयानों से बचना चाहिए। कांग्रेस महागठबंधन की मजबूती के लिए विष पीने को भी तैयार है।
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कई सवाल अनुत्तरित रह गए
हालांकि प्रेस कंफ्रेस में पत्रकारों के कई सवाल अनुत्तरित रह गए। जब के राजू एक ईमानदार और कुशल राजनेता हैं, तो उनके बयान को कांग्रेसियों ने सही क्यों नहीं माना। भावावेश में दिया गया बयान क्यों करार दिया गया। क्या कोई कुशल और सफल राजनेता भावावेश में गठबंधन के सहयोगी दलों पर विश्वासघात और धोखा देने का आरोप लगा सकता है। और अगर गठबंधन के सहयोगी दल पीठ में छूरा घोंप रहे हैं तो फिर उस गठबंधन में बने रहने की कांग्रेस की क्या मजबूरी है। इतना ही नहीं जिस दिन परिमल नाथवानी ने नामांकन दाखिल किया था, उसी दिन स्पष्ट हो गया था कि हॉर्स ट्रेडिंग होगी। फिर महागठबंधन के विधायक क्यों बिके। इतना ही नहीं बिहार, उड़ीसा और हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के ही विधायकों ने पार्टी को धोखा क्यों दिया। जानकार बताते हैं कि राजद और माले के हमले के बाद कांग्रेस अब बैकफुट पर आने को मजबूर हो गयी है। क्योंकि प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को अब लगने लगा है कि बयानबाजी अगर बढ़ती गयी तो यह सरकार की सेहत खराब कर सकती है और उसका सबसे अधिक असर कांग्रेस पर ही पड़ेगा।
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