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कांग्रेस नेता विनय सिन्हा ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, परिसीमन नीति में संशोधन कर सीटों की संख्या बढ़ाने पर विचार के लिए कहा

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रांची
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव विनय सिन्हा दीपू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन नीति में संशोधन करते हुए झारखंड विधानसभा सीटों के विस्तार तथा सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 करने की मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि झारखंड के विशिष्ट भूगोल, पठारी सामाजिक ताने-बाने और आदिवासियों के ऐतिहासिक अधिकारों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए आगामी परिसीमन नीति में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए। विनय सिन्हा ने झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक बनावट, छोटानागपुर एवं संताल परगना के पठारी क्षेत्रों, घने जंगलों और नदियों द्वारा विभाजित भौगोलिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए यह मांग उठाई है।

भौगोलिक क्षेत्र का दिया हवाला 

उन्होंने कहा कि झारखंड का कुल क्षेत्रफल 79,716 वर्ग किलोमीटर है, जिसका बड़ा हिस्सा ऊंचे पठारों, घने जंगलों (सारंडा, पारसनाथ आदि) तथा दुर्गम पहाड़ियों से आच्छादित है। वर्तमान में राज्य में केवल 81 निर्वाचित विधानसभा सीटें हैं। इसका सीधा अर्थ है कि औसतन एक विधानसभा क्षेत्र लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौती के स्थायी, न्यायसंगत एवं सर्वमान्य समाधान के लिए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में वे प्रधानमंत्री से निम्नलिखित ऐतिहासिक कदम उठाने का विनम्र अनुरोध करते हैं- 
कुल विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 की जाए
उन्होंने मांग की है कि झारखंड विधानसभा की निर्वाचित सीटों की संख्या वर्तमान 81 से बढ़ाकर 150 की जाए। सीटों की संख्या 150 होने पर प्रति विधानसभा क्षेत्र का औसत भौगोलिक क्षेत्रफल घटकर लगभग 530 वर्ग किलोमीटर रह जाएगा। इससे जनप्रतिनिधियों की जनता तक पहुंच आसान होगी तथा सुदूर वनांचलों में प्रशासनिक नियंत्रण और अधिक मजबूत होगा।


आदिवासी (एसटी) सीटों का पूर्ण भौगोलिक संरक्षण
उन्होंने कहा कि कुल सीटों की संख्या 150 होने से सुदूर पहाड़ी एवं आदिवासी बहुल जिलों, जैसे खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार और दुमका की सीटें उनके व्यापक भौगोलिक विस्तार के अनुरूप सुरक्षित रह सकेंगी। इससे जनसंख्या आधारित परिसीमन के कारण इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कमजोर नहीं होगा।
सभी प्रमंडलों और समुदायों का संतुलित विकास
विनय सिन्हा ने कहा कि सीटों की संख्या 150 होने से केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी पांच प्रमंडलों के अन्य समुदायों, जिनमें पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति तथा सामान्य वर्ग शामिल हैं, का प्रतिनिधित्व भी उनकी क्षेत्रीय आबादी के अनुरूप बढ़ेगा। इससे किसी भी वर्ग या क्षेत्र की वर्तमान सीटों में कटौती की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और क्षेत्रीय असंतोष की संभावनाएं भी समाप्त होंगी।


 

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