द फॉलोअप डेस्क
झारखंड प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव का टिकट पाने की होड़ अब परवान चढ़ने लगी है। पार्टी के कई नेता दिल्ली दरवार में माथा टेक आए हैं तो कई नेताओं ने 29 मई को रांची आएं प्रदेश प्रभारी के राजू से मिल कर भी अपनी दावेदारी पेश की है। इस होड़ में आधा दर्जन से अधिक नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। बताते हैं कि टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या भी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के लिए अब परेशानी का शबब बनने लगी है। इतना ही इंडिया गठबंधन के दलों को भी यह दावेदारों की यह भीड़ शुकून नहीं दे रहा है। इस होड़ के बीच जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता अब झारखंड से किसी दलित समुदाय को भी राज्यसभा का टिकट देने पर गंभीरता से विचार करने लगे हैं। के राजू ने कल रांची में पैर रखते ही यह कहा भी था कि पार्टी का प्रत्याशी स्थानीय होगा। अर्थात इस बार किसी आयातित नेता को पार्टी टिकट नहीं देगी। उसके बाद ही स्थानीय नेताओं में टिकट को लेकर होड़ बढ़ गयी है।

जानकारों का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस का दलित वोट बैंक पर कुछ ज्यादा ही फोकस है। लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी का भी इस पर खासा जोर है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू भी इसी समुदाय से आते हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस का जब देश की राजनीति में अच्छे दिन हुआ करते थे, दलित समुदाय इस पार्टी का सबसे बड़ा वोट बैंक हुआ करता था। इसी कारण जगजीवन राम को कांग्रेस में वर्षों तक एक अहम स्थान दिया गया था। उनके कद का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि उनके नाम के आगे बाबू लगता था। बाबू जगजीवन राम। उस समय जब देश की सामाजिक व्यवस्था में उच्च जाति के लोग दलित समुदाय को हीन भावना से देखते और उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार भी करते थे। दलित भारत में शोषित समाज के रूप में चिह्नित था।

यहां मालूम हो कि 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में दलितों (अनुसूचित जाति/SC) की कुल आबादी लगभग 20 करोड़ 14 लाख है, जो देश की कुल जनसंख्या का 16.6% है। वहीं, झारखंड में दलितों की कुल आबादी 39 लाख 85 हजार से अधिक है, जो राज्य की कुल आबादी का 12.08% (लगभग 12.1%) है। कांग्रेस झारखंड में बिखरे हुए दलित समुदाय को अपनी झोली में करने के लिए दलित कार्ड पर जोर दे रहा है। हाल में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी झारखंड में अनुसूचित जाति आयोग को प्रभावी बनाने तथा अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद के पुनर्गठन की मांग दुहरायी थी। इसको लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भी लिखा था। इस लिहाज से भी झारखंड में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस दलित कार्ड खेल सकती है।
