जीतेंद्र कुमार
राज्य सरकार का कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग। 24 अक्तूबर को सरकार के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को एक पत्र लिखा है। इस पत्र (पत्रांक-6262) का मजमून अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानांतरण-पदस्थापन एवं कार्य हस्तांतरण से जुड़ा है। उसमें लिखा गया है कि अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद विभिन्न विभागों और कार्यालयों द्वारा स्थानांतरण-पदस्थापन को रद्द करने का अनुरोध किया जाता है। जबकि एक ही प्रकृति का कार्य करते करते कर्मचारियों-अधिकारियों में नीरसता उत्पन्न हो जाती है। अपने काम के प्रति उनकी दिलचस्पी कम हो जाती है। सरकारी कर्मी की कार्य कुशलता और दक्षता में स्थिरता आ जाती है। जबकि कार्य कुशलता और दक्षता में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए स्थानांतरण-पदस्थापन जरूरी होता है। यह प्रशासनिक सुधार का महत्वपूर्ण अंग भी है। इसलिए कोई भी कर्मी कभी अपरिहार्य नहीं हो सकता। उसके बिना उस विभाग का काम नहीं चले, यह हो ही नहीं सकता। इसके लिए कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने सभी विभागों से एक एसओपी बनाने का निर्देश दिया है। ताकि स्थानांतरण-पदस्थापन के बाद संबंधित कर्मी नये स्थान पर योगदान दे सके। उसका स्थानांतरण पदस्थापन को स्थगित करने का अनुरोध नहीं किया जा सके। कार्य हस्तांतरण में किसी प्रकार की कोई परेशानी पैदा नहीं हो।

अब सचिवालय के सच को समझने वाले बताते हैं। भाई कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सभी विभागों का नोडल डिपार्टमेंट है। कर्मियों की सेवा शर्त नियमावली, स्थानांतरण-पदस्थापन, कार्य हस्तांतरण की प्रक्रिया को बनाने और उसका अनुपालन कराने की मुख्य और महती जिम्मेदारी इसी विभाग की है। लेकिन अपनी जिम्मेदारी को यह विभाग खुद ही नहीं समझ रहा है। अपनी टोपी दूसरे के सिर पहनाने की कोशिश कर रहा है। वे बताते हैं कि कार्मिक को कौन बताए कि जिस अधिकारी या कर्मचारी के स्थानांतरण को स्थगित करने का आग्रह किया जाता है, वे उसी पुराने स्थान पर रहते हुए आनंद का अनुभव करते हैं। उन्होंने वहां जिस विशेष क्षेत्र में अपनी कार्य कुशलता और दक्षता में वृद्धि की है, उससे वे वहीं रह कर तृप्ति का अनुभव करते हैं। वे दूसरे किसी विभाग में जाकर अपनी विशेषज्ञता की बलि नहीं देना चाहते। और अगर ये सब भी कार्मिक पता नहीं है। इसकी भी समझ नहीं है तो भला कार्मिक को अपने कर्मियों और अधिकारियों के बारे में पता क्या है। और अगर पता है तो हमारा कार्मिक खुद बौना डिपार्टमेंट बनता जा रहा है। इसलिए पहले तो कार्मिक को ही अपने लिए एसओपी बनाना जरूरी हो गया है। ताकि उसके द्वारा जारी आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके। इस तरह का गिरगिराने जैसा आदेश जारी करने की उसके सामने मजबूरी पैदा न हो।