द फॉलोअप डेसक, रांचीः
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार से सोमवार को झारखंड छात्र संघ एवं आमया संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस अवसर पर संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष एस अली ने उन्हें एक मांग पत्र भी सौंपा। उसमें SIR-2026 की प्रक्रिया के दौरान नागरिकों के सामने पैदा हो रही विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्य कराया गया है। आयोग से मांग की गयी है कि अगर किसी मतदाता के पास आवश्पयक दस्तावेजन नहीं है तो उनकी पहचान ग्राम सभा से करायी जाए। पत्र में आगे कहा गया है कि त्रुटियों के मूल में वर्ष 2003 की मतदाता सूची है। क्योंकि 2003 की मतदाता सूची को आयोग ने सुधारा नहीं जबकि मतदाताओं ने बाद में त्रुटियों को सुधार करा लिया। अब दोनों दस्तावेज मैच नहीं कर रहे। इससे मतदाताओं को भारी परेशानी हो रही है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में काफी संख्या में नागरिकों के नाम, उपनाम/टाइटल, पिता/पति/माता के नाम, आयु तथा पारिवारिक विवरण में त्रुटियां थीं। बाद में निर्वाचन आयोग द्वारा जारी EPIC तथा संशोधित मतदाता सूचियों में अनेक नागरिकों ने अपने विवरणों में विधिवत सुधार कराया, किंतु वर्तमान SIR-2026 में वर्ष 2003 के आधार अभिलेख से मैपिंग/अनमैपिंग किए जाने के कारण पुराने त्रुटिपूर्ण विवरण पुनः विवाद का कारण बन रहे हैं।
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प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से आग्रह किया है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम, टाइटल, माता-पिता के नाम एवं आयु संबंधी पुरानी त्रुटियों को वर्तमान नागरिक की पात्रता के विरुद्ध स्वतः निर्णायक आधार न माना जाए। वर्ष 2003 के बाद जारी एवं संशोधित मतदाता अभिलेखों को भी उचित महत्व देते हुए समग्र साक्ष्य के आधार पर निर्णय लिया जाए। दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने वाले नागरिकों के लिए खतियान, वंशावली, पुराने सरकारी अभिलेख, पारिवारिक अभिलेख, स्व-घोषणा/शपथ-पत्र तथा अन्य विश्वसनीय स्थानीय साक्ष्यों को परिस्थिति के अनुसार सहायक साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में संविधान के अनुच्छेद 244(1) तथा PESA Act, 1996 की भावना एवं लागू प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए संबंधित ग्रामसभा तथा ग्राम प्रधान, मुखिया, वार्ड पार्षद एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा जारी प्रमाण-पत्र, पहचान/निवास/पारिवारिक संबंध संबंधी पुष्टि एवं गवाही को परिस्थितिनुसार प्रासंगिक एवं सहायक साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

इसी तरह आयु संबंधी विसंगतियों के मामलों में केवल तकनीकी आयु-अंतर के आधार पर दावा अस्वीकार न किया जाए तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फाइनल मतदाता सूची में शामिल किया जाए। Form-7 से संबंधित प्रत्येक नाम-विलोपन आवेदन में संबंधित मतदाता को नोटिस एवं प्रभावी सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए तथा जीवित व्यक्ति को मृत अथवा गलत तरीके से स्थानांतरित बताकर किए गए संदिग्ध आवेदनों की विशेष जांच कराई जाए। सभी जिलों में SIR-2026 से संबंधित लंबित मामलों के लिए विशेष हेल्प डेस्क/सिंगल-विंडो व्यवस्था बनाई जाए। जिन नागरिकों को नोटिस जारी हुआ है, उन्हें अपने मामले की सुनवाई, प्रस्तुत दस्तावेज एवं निर्णय की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा प्रतिकूल आदेश की स्थिति में कारणयुक्त आदेश उपलब्ध कराया जाए।
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