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मुख्यमंत्री जी जसीडीह जाइए, नहीं तो हम जाएंगे, रैयतों को उजड़ते हुए हम नहीं देख सकतेः बाबूलाल मरांडी

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द फॉलोअप डेस्क
प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए आज रैयतों की जमीन से बेदखली, धान क्रय, सूचना आयुक्त, लोकायुक्त और डीजीपी की नियुक्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए। हाल के वर्षों में यह पहला मौका दिखा जब बाबूलाल मरांडी ने तर्क और तथ्य के साथ सदन में अपनी बात रखी। जिस दौरान बाबूलाल मरांडी के लगभग आधे घंटे के भाषण के बीच प्रदीप यादव और इरफान अंसारी की छिटपुट टोकाटाकी छोड़ दें तो सदन शांत और पूरी तरह गंभीर बना रहा। मुख्यमंत्री भी उस समय सदन में मौजूद थे, लेकिन चुपचाप बाबूलाल मरांडी की बात सुनते रहे। सत्ता पक्ष की ओर से अक्सर हो हंगामा या छींटाकशी किए जाने की घटना भी नहीं दिखी। उन्होंने प्रदीप यादव, उमाशंकर रजक और अन्य विधायकों द्वारा एप्सटीन से पीएम का नाम जोड़े जाने को स्पंज करने का सुझाव भी दिया। प्रदीप यादव ने कहा था कि को आइंस्टीन का मेल आया था आज मोदी को एप्सटीन का मेल आ रहा है। डीजीपी की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह कहते हुए बाबूलाल मरांडी से चर्चा न करने का आग्रह किया कि यह विषय सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, फिर भी वह बोलते ही रहे। 


जमीन को केंद्र में रख कर बाबूलाल मरांडी ने किया सरकार पर प्रहार
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आजादी के पहले से हमारे शहीदों ने, बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हों, तेलंगा खड़िया,नीलांबर पितांपर, वीर बुधु भगत ने जल जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ी। आजादी के बाद इन्हीं मुद्दों को लेकर जयपाल सिंह मुंडा, शिबू सोरेन और कई अन्य शहीदों ने लड़ाई लड़ी। अलग झारखंड बना। लेकिन आज हो क्या रहा है।  जसीडीह में उद्योग के नाम पर लोगों को उजाड़ा जा रहा है। रैयतों की जमीन पर बुलडोजर चल रहा है। उन्होंने बताया कि यह जमीन बिहार के समय 1975 में  अधिग्रहित की गयी थी। उस समय की परिस्थिति अलग थी। आज परिस्थिति अलग है। उद्योग लगे, कोयला खनन हो, रिम्स टू बने, इसका उन्हें कोई विरोध नहीं। लेकिन खेती योग्य जमीन के बदले यह सब बंजर भूमि पर हो। उन्होंने कहा कि जमीन ही आदिवासियों के जीविकोपार्जन का साधन है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से यह भी कहा कि वह जसीडीह जाएं। वहां की स्थिति देखें। डीसी को बोल कर तत्काल काम रुकबाएं। अन्यथा वह फिर वहां जाएंगे। वह रैयतों को उजड़तेत हुए नहीं देखें। वैसे ही दुमका के अमरापाड़ा में कोल ब्लॉक के नाम पर जमीन ले लिया जा रहा है। गिरिडीह के तीसरी ब्लॉक के गांव में 1940 का हुकुमनामा और भूदान में मिली जमीन है। वो 50-60 साल से खेती कर रहे हैं। आज वन विभाग उजाड़ रहा है। अगर गलत होगा तो वह राजनीति से इस्तीफा दे देंगे। जमीन से जुड़े मुद्दों पर विधानसभा की कमिटी बने। वह समस्याओं को देखेगी और उसका समाधान निकालने की कोशिश करेगी।


खेती की जमीन पर रिम्स टू क्यों
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नगड़ी की खेती योग्य जमीन पर रिम्स टू का निर्माण क्यों। उन्हें मांडर में रैयतों ने कहा कि वे 200 एकड़ से अधिक बंजर भूमि बता सकते हैं, जहां रिम्स टू का निर्माण हो। उन्होंने कहा कि रांची से 20 किलोमीटर दूर रिम्स टू बना दीजिए। सड़क बना दीजिए। जब लोग बंगलुरू और दिल्ली इलाज के लिए जा सकते हैं, 20 किलोमीटर दूर भी इलाज के लिए चले जा सकते हैं। बीच में खड़े होते हुए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि नामकुम में आदिवासी की जमीन पर आरएसएस कार्यालय बनाया। जामताड़ा में जमीन कब्जा करके भाजपा का कार्यालय बनाया गया। उस समय बाबूलाल जी को परेशानी नहीं हुई। आज हम अस्पताल बना रहे हैं तो विरोध कर रहे हैं। इस पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वह अस्पताल निर्माण का विरोध नहीं कर रहे। मेरी बात ही नहीं समझ रहे हो, कहां से पढ़ कर आए हो। इस क्रम में प्रदीप यादव का कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा 2013 में बनाया गया भूमि अधिग्रहण कानून को केंद्र की मोदी सरकार ने अडाणी जैसी कंपनियों के पक्ष में 2015 में कमजोर कर दिया। इस पर बाबूलाल फिर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जमीन राज्य का विषय है। छह साल से आपकी सरकार है। क्या किए,यह तो बताइए।


सीएम के यूके दौरे पर दी सफाई
मुख्यमंत्री के यूके दौरे पर बाबूलाल मरांडी द्वारा की गयी प्रतिक्रिया पर उन्होंने कहा कि हमने तब मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर सवाल उठाया, जब वो 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय दिवस पर देश से बाहर थे। भला किसी राज्य का मुख्यमंत्री 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व पर अपने राज्य तो क्या देश से बाहर रहता है।

अनुराग गुप्ता के बाद तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाए जाने पर सवाल उठाया
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पुलिस महकमा महत्वपूर्ण विभाग है। भ्रष्टाचार पर अंकुश या कार्रवाई की अंतिम जिम्मेदारी इसी की है। लेकिन घटना देखिए। पहले अनुराग गुप्ता को निलंबित किया गया। फिर उन्हें डीजीपी बनाया गया। नवंबर 2025 में फिर उनसे इस्तीफा ले लिया गया। उसके बाद तदाशा मिश्रा को गलत तरीके से प्रभारी डीजीपी बनाया गया। जब रिटायरमेंट में दो महीना शेष बचा था तो प्रमोशन देकर दिसंबर 2027 के लिए डीजीपी बना दिया गया। वह पैनल में नहीं थी। नियम कानून को ताक पर रख करके डीजीपी बनाया गया।



शराब घोटाले के 28 आरोपी बनाए गए, लेकिन किसी के विरुद्ध 90 दिनों में चार्जशीट नहीं हुआ
मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले को लेकर उन्होंने 2022 में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। कार्रवाई नहीं हुई। बाद में एक दिन पता चला कि सीएम के साथ उठने, बैठने और देर रात 12 बजे तक रहने वाले एक अधिकारी की गिरफ्तारी हो गयी। एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शराब घोटाले में 28 लोगों को आरोपी बनाया गया। एसीबी इनमें से किसी के विरुद्ध 90 दिनों में चार्जशीट दायर नहीं कर सकी है। परिणामस्वरूप एक एक कर डिफॉल्ट बेल होता जा रहा है।


सूचना आयुक्त, लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई प्रावधान किये हैं। उनका झारखंड में क्या हाल है। 2020 से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का पद रिक्त है। लोकायुक्त का पद जून 2021 से रिक्त है। जबकि कांग्रेस ने राइट टू इन्फॉर्मेशन का कानून बनाया। ताकि लोगों को सूचना मिले। भ्रष्टाचार रुके। फिर भी लोग कह रहे हैं सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है।


कहां गया ह्वेकिल ट्रैकिंग सिस्टम
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पिछले बजट में 18 खनिज ब्लॉक को नीलाम करने का वादा किया गया था। एक भी नहीं हुआ। पिछले साल अभिभाषण में खनिजों की अवैध ढ़लाई पर नियंत्रण के लिए वेकिल ट्रैकिंग सिस्टम लगाने की बात कही गयी थी। क्यों नहीं लगा। कोयला चोरी, बालू चोरी जारी है।


धान क्रय में बिचौलिए हावी, किसान बेहाल
बाबूलाल मरांडी ने धान क्रय की स्थिति पर भी सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि इस बार 60 लाख क्विंटल धान क्रय का लक्ष्य था। इसके लिए 2.84 लाख किसान निबंधित किए गए। लेकिन मात्र 41960 किसानों से ही धान खरीदा गया। मात्र 40 फीसदी। इससे पहले 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में यही स्थिति रही। उन्होंने कहा कि किसानों से धान क्रय नहीं हो रहा।डीसी से पूछने पर कहते हैं गोदाम भरा है। अभी मार्च तक खरीद होगी। लेकिन डीसी तो पढ़े-लिखे बाबू हैं। उन्हें नहीं पता कि धान की रोपनी, कटाई कब होती है। लेकिन हमारे विधायकों और मंत्रियों को तो पता है। दिसंबर में धान कट जाता है। फिर भला किसानों से अब तक धान क्यों नहीं खरीद हो पायी। इसलिए कि बिचौलिए हावी हैं। बीच में खड़े होते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि पूर्व में सुखाड़ के कारण धान की पैदावार कम हुई थी। इस बार अभी मार्च तक क्रय होना है। हम धान खरीदेंगे। इस पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मार्च में धान खरीद होगी, लेकिन बिचौलिए से। यही तो समझना और सुधारना है।

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