द फॉलोअप डेस्क
देश के राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद और अंचलाधिकारी शंभू राम के नेतृत्व में शहर के भारत माता चौक के पास सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। वहीं, प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रखंड और अंचल कर्मियों के द्वारा भी सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंचलाधिकारी ने कहा कि सन 1882 में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने स्वतंत्र रूप से अपने उपन्यास आनंदमठ में वन्दे मातरम गीत की रचना की थी। इसे पहली बार सन 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा कोलकाता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया था और राजनीतिक नारे के रूप में 7 अगस्त 1905 को पहली बार प्रयोग किया गया था।
थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद ने कहा कि वन्दे मातरम गीत एक ऐसा तराना है, जो देश के स्वतंत्रता सेनानियों के आंदोलन का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम का अर्थ है “माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।” यह रचना स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं पर अमर प्रभाव छोड़ने वाला गीत बन गई। इसने युवाओं में ऊर्जा और जोश भरा और अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया। उन्होंने यह भी बताया कि 'वन्दे मातरम' पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में 7 नवंबर 1875 को प्रकाशित हुई थी। बाद में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने इसे अपने अमर उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया।
थाना प्रभारी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाना सभी भारतीयों के लिए एकता, बलिदान और भक्ति के शाश्वत संदेश को दोहराने का अवसर है, जो वन्दे मातरम में समाहित है। इस अवसर पर सब-इंस्पेक्टर सुशील उरांव, धनश्याम मिश्रा, परमानंद पाल, राजीव कुमार, निर्मल कुमार सिंह, सुरेंद्र राम, गूंजा कुमारी, बसंत मिश्रा, अजय गुप्ता, अनिल पासवान, मिथिलेश यादव, लाला सोनी, रवींद्र साव, टिंकू ठाकुर सहित कई लोग उपस्थित थे।
