रांची
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बीते कल एक्स पर पोस्ट कर चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाया था और नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि प्रशासन शिष्टाचार तक भूल गया. उनके इस ट्वीट के भाजपा उनके समर्थन में उतर गई है. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू,नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, सांसद निशिकांत दुबे समेत अन्य नेताओं ने उनका समर्थन किया और राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए.
लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन: आदित्य साहू
इस मुद्दे को लेकर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने ट्वीट कर लिखा, "झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जनजातीय समाज के सम्मानित नेता अर्जुन मुंडा जी के साथ चाईबासा परिसदन में जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रशासनिक मर्यादाओं एवं जनजातीय समाज के सम्मान का भी विषय है."
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जनजातीय समाज के सम्मानित नेता श्री @MundaArjun जी के साथ चाईबासा परिसदन में जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रशासनिक मर्यादाओं एवं जनजातीय समाज के सम्मान का भी विषय है।… https://t.co/fYCzNIwp1p
— Aditya Sahu (@AdityaPdSahu) May 17, 2026
CM हेमंत अधिकारों को दे नसीहत, कुर्सी का अहंकार क्षणिक होता है: बाबूलाल
वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, "हेमंत सोरेन जी, सत्ता का समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता. आज आप मुख्यमंत्री हैं, कल आप भी भूतपूर्व हो सकते हैं. इसलिए लोकतंत्र की मर्यादा, परंपराओं और सामाजिक सम्मान को कभी कमजोर मत होने दीजिये. झारखंड की पहचान केवल सरकारों से नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, आदिवासी परंपराओं, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवहार से बनती है. यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ सार्वजनिक व्यक्तित्वों और समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन हो जाये, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे लोकतांत्रिक संस्कार का अपमान बन जाता है. अधिकारियों को यह नसीहत दीजिये कि कुर्सी का अहंकार क्षणिक होता है, लेकिन व्यवहार और सम्मान की छाप वर्षों तक लोगों के दिलों में रहती है. सत्ता बदलती रहती है, मगर जनता सब देखती है और समय हर बात का हिसाब भी रखता है.
हेमंत सोरेन जी, सत्ता का समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। आज आप मुख्यमंत्री हैं, कल आप भी भूतपूर्व हो सकते हैं — इसलिए लोकतंत्र की मर्यादा, परंपराओं और सामाजिक सम्मान को कभी कमजोर मत होने दीजिये।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 17, 2026
झारखंड की पहचान केवल सरकारों से नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, आदिवासी परंपराओं, सामाजिक… https://t.co/gwXTNas7xb
2019 से ये झेल रहा हूं, सामूहिक लड़ाई से ही राक्षकों विनाशा होगा: निशिकांत दुबे
गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि यह ग़लत है, लेकिन यह तो मैं 2019 से लगातार झेल रहा हूं. मेरे और मेरे परिवार के उपर तो 52 केस दर्ज हैं. सामूहिक लड़ाई ही राक्षसों का विनाश कर सकती है.
यह ग़लत है,लेकिन यह तो मैं 2019 से लगातार झेल रहा हूँ,मेरे और मेरे परिवार के उपर तो 52 केस दर्ज हैं @yourBabulal @BJP4Jharkhand @MundaArjun सामूहिक लड़ाई ही राक्षसों का विनाश कर सकती है @dprakashbjp @AdityaPdSahu https://t.co/eQmRwDgF71
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) May 17, 2026
क्या था मामला?
दरअसल पूर्व मंत्री अर्जुन मुंडा कल ने कल ट्वीट कर चाईबासा में प्रशासन के रवैया पर सवाल उठाया था. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था वर्तमान में वे न तो विधायक हैं, न सांसद और न ही मंत्री हैं, लेकिन पहले वे झारखंड के मुख्यमंत्री और भारत सरकार में मंत्री रह चुके हैं. लेकिन उनके चाईबासा प्रवास के दौरान प्रशासन द्वारा शिष्टाचार और सामान्य सौजन्यता जैसी जरूरी औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया. उन्होंने इसे प्रशासनिक अनुभव की कमी, प्रशासनिक अकड़ या सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता से जोड़ा. उन्होंने कहा कि पहले की परंपरा के अनुसार जिले में आने वाले वरिष्ठ सार्वजनिक नेताओं से प्रशासन विकास, जनसरोकार और जिले की गतिविधियों पर चर्चा करता था, जिससे प्रशासन की कार्यसंस्कृति और जिले की गरिमा दोनों मजबूत होती थीं. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम सिंहभूम एक ऐतिहासिक और जनजातीय बहुल जिला है, इसलिए वहां इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है.