द फॉलोअप डेस्क
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और DGP अनुराग गुप्ता पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "समाचारों से पता चल रहा है कि फिलहाल जमानत पर बाहर रामगढ़ पुलिस का वांटेड राजेश राम डीजीपी के कार्यालय में लगातार आता-जाता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे कभी गिरफ्तार ही नहीं किया। पहली बार जब राजेश राम गिरफ्तार हुआ था, उसके बाद इंस्पेक्टर गणेश सिंह ने भुरकुंडा थाना प्रभारी से बात की थी। यह शायद वही गणेश हैं जिन्हें अवैध डीजीपी का वरदहस्त प्राप्त है, या यूं कहें तो अवैध डीजीपी के अवैध संसाधन संग्रहकर्ताओं की टीम के प्रमुख सदस्य हैं। "
उन्होंने आगे कहा, "एक वायरल ऑडियो के मुताबिक पुलिस मुख्यालय में तैनात, डीजीपी अनुराग गुप्ता के करीबी माना जाने वाला सिपाही रंजीत राणा ने ओडिशा के उसी कारोबारी से संपर्क करने का प्रयास किया, जिससे राजेश राम ने कथित रूप से 65 लाख रुपए की वसूली की। यह बातें आप सभी को कोई फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा दिखाई देता होगा, लेकिन यह हकीक़त है। झारखंड को लूटकर खोखला करने की हकीक़त।।। राजेश, गणेश, राणा, दीपक जैसे कई और महारथी तो इस महालूट के किरदार मात्र हैं, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अवैध डीजीपी के इशारे पर अपने-अपने हिस्से के गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।"
समाचारों से पता चल रहा है कि फिलहाल जमानत पर बाहर रामगढ़ पुलिस का वांटेड राजेश राम डीजीपी के कार्यालय में लगातार आता-जाता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे कभी गिरफ्तार ही नहीं किया।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) September 22, 2025
पहली बार जब राजेश राम गिरफ्तार हुआ था, उसके बाद इंस्पेक्टर गणेश सिंह ने भुरकुंडा थाना प्रभारी से बात की… pic.twitter.com/PRjqXOVg8G
बता दें कि बाबूलाल मरांडी ने इस संबंद में 1 मई को एक पोस्ट किया था और उसमें लिखा था, "मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, पिछले कुछ दिनों से धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़ के इलाक़ों में घूमने के दरम्यान लोगों ने बताया कि उन इलाक़ों में सोनू, मनोज, गणेश, रंजीत, अनूज नाम जैसे कुछ सरकारी-गैरसरकारी लोग घूम-घूम कर "धूम” मचाये हुए हैं। इनमें से कुछ तो नये-नये स्कारपियो पर सवार होकर क्षेत्र में सक्रिय देखे गये हैं। ये लोग कौन हैं? क्या काम करने के लिये किसकी ओर से लगाये हैं और क्या काम कर रहे हैं? यह जांच का विषय है। आप से अनुरोध है कि अपनी एजेंसियों से ऐसे लोगों के कार्यकलाप की जानकारी लेने का कष्ट करेंगे।"
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इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा, "आपके संज्ञान में मेरा यह पोस्ट होगा। अगर भूल गये हों तो फिर से देख लीजिये फिर यह बताईये कि- इन अवैध वसूलियों में आपकी कितनी हिस्सेदारी है? शराब घोटाले में समय पर चार्जशीट न कर छत्तीसगढ़ से लेकर एनसीआर दिल्ली तक जिन धनपशु माफियाओं को ज़मानत दिलवायी गयी उसमें सौ करोड़ से भी ज्यादा का वारा न्यारा होने की चर्चा है। इसमें आपको कितना शेयर मिला? अगर नहीं मिला तो चार्ज शीट न कर पाने के ज़िम्मेवार किन अफ़सरों पर आपने कठोर कार्यवाही किया है और उन्हें क्या सज़ा मिली? ये राणा और गणेश जी जैसे कई लोगों के कार्यकलाप को जब हमने पहले भी आपके संज्ञान और सोशल मीडिया में भी लाया था तो इन गंभीर मामलों में आपकी चुप्पी का राज क्या है?"
उन्होंने आगे लिखा, "हेमंत जी, आज से करीब 30 साल पहले जब तकनीक विकसित नहीं हुई थी, तब भी जांच एजेंसियों ने चारा घोटाले का पर्दाफाश कर घोटालेबाजों को कड़ी सजा दिलाने का काम किया था। अब तो तकनीक काफी आगे जा चुकी है। आप यह कैसे मान बैठे हैं कि आप जो मर्जी सो लूट करते रहेंगे और मंहगे वकीलों के दम पर हर बार बच ही जायेंगे? कहीं लिखकर रख लीजिये। भले ही थोड़ा वक्त लगे लेकिन इन महाघोटालों के लिये देर सबेर आप पकड़े जायेंगे और सजा भी होगी। लालू प्रसाद जी को ही देख लीजिये। बीस साल लगे जरूर लेकिन सजा तो हुई ही। बबूल का पेड़ लगा रहे हैं तो कॉंटे भी तो आपको ही चुभेंगे न। आप झारखंड को लूटने का और सबूत मिटाने का जितना भी षड्यंत्र कर लीजिए। लेकिन जांच एजेंसियां किसी को बख्शने नहीं वाली। सबका हिसाब होगा, बराबर हिसाब होगा।"
