अमड़ापाड़ा/पाकुड़:
भाजपा नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने शुक्रवार को चिलगो गांव पहुंचकर विस्थापित ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने जमीन, आवास और आने वाली पीढ़ियों के पुनर्वास को लेकर सरकार और संबंधित कंपनी की व्यवस्था पर सवाल उठाए। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नए चिलगो गांव में विस्थापित परिवारों को फिलहाल करीब 7 डिसमिल जमीन मिली है, लेकिन परिवार बढ़ने और बच्चों के विवाह के बाद उनके रहने की व्यवस्था क्या होगी, इस पर सरकार को अभी से गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास की योजना 50 से 100 साल यानी 4 पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
मकानों की गुणवत्ता की शिकायत की गई
ग्रामीणों ने बाबूलाल मरांडी को मकानों की गुणवत्ता की भी शिकायत की। कई घरों की छत से पानी टपकने और निर्माण में खामियों की बात सामने आई। मरांडी ने सरकार और कंपनी के अधिकारियों से मौके पर जांच कराकर निर्माण संबंधी समस्याओं को तत्काल दूर कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक तरफ खदानों के कारण जमीन में गड्ढे बन रहे हैं और दूसरी ओर पहाड़ हैं। ऐसे में भविष्य में जमीन की कमी और गंभीर होगी। यदि अभी से स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियों को पलायन कर मजदूरी के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि चिलगो के विस्थापितों के अधिकार और उनके बच्चों के भविष्य का सवाल केवल आज का नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों का है। इस मुद्दे को वे राज्य सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे।