द फॉलोअप डेस्क, पाकुड़:
संथाल परगना में कथित डेमोग्राफी बदलाव और अवैध घुसपैठ के आरोपों को लेकर बाबूलाल मरांडी ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची की विशेष जांच कराने की मांग की है। पाकुड़ सर्किट हाउस में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी और मतदाता संख्या में हो रहे बदलावों का तथ्यात्मक और तकनीकी परीक्षण जरूरी है।
मरांडी ने विशेष रूप से पाकुड़ और साहिबगंज जिलों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2001 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों में आदिवासी और मुस्लिम आबादी के अनुपात में बदलाव दिखाई देता है। उन्होंने इन आंकड़ों के साथ हाल के वर्षों में मतदाता संख्या में हुई वृद्धि को भी जांच के दायरे में रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि संथाल परगना की 18 विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा होनी चाहिए, ताकि फर्जी दस्तावेजों अथवा गलत पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल होने की स्थिति सामने आ सके। उनके अनुसार, जांच केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि तकनीकी स्तर पर भी की जाए।

पुराने दस्तावेजों से हो मतदाता सूची का मिलान
पूर्व मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पुराने खतियान, वंशावली और पूर्व की मतदाता सूचियों को आधार बनाकर सत्यापन कराने का सुझाव दिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ इलाकों में फर्जी वंशावली और दस्तावेजों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। मरांडी ने SPT एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि संथाल परगना में भूमि हस्तांतरण को लेकर विशेष कानूनी प्रावधान हैं। ऐसे में बाहरी लोगों के बसने और जमीन पर कब्जे से संबंधित शिकायतों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संथाल परगना की जनसांख्यिकी में बदलाव का मुद्दा केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध क्षेत्र की सामाजिक संरचना और आदिवासी समुदाय के हितों से भी है। उन्होंने चुनाव आयोग से विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
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