द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में बारिश थमते ही हीट स्ट्रोक का खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने इस बाबत गाइडलाइन भी जारी कर दिया है। मिली खबर के मुताबिक हीट स्ट्रोक के अस्पतालों को संभावित मरीजों की समय पर पहचान और उपचार की व्यवस्था करने का निर्देश जारी किया गया है। जारी गाइडलाइन में जिले के अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए अलग से डेडिकेटेड बेड तैयार रखने के लिए कहा गया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इमरजेंसी कॉल के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करने का निर्देश दिया है। डेडिकेटेड हीट स्ट्रोक रूम की अलग से पहचान कर उस स्थान पर आईस पैक, ठंडा पानी, कुलर, ओआरएस पैकेट और एंटी डायरियल ड्रग सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों और विभागों को दिया गया है।

अस्पतालों को दिये गये ये भी निर्देश
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजूर्गों के लिए आउटरिच क्लिनिक का इंतेजाम करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही अस्पतालों में ओपीडी और इनडोर में ठंडा पानी, ठंडी हवा, ओआरएस के साथ ही बैठने का इंतजाम भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। यही नहीं, विभाग ने हीट रिलेटेड रोग से संबंधित मरीजों की सतत निगरानी के लिए उनका हर दिन का जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा है। जारी आदेश के मुताबिक राज्य के सभी जिलों के सीएस को मार्च से जुलाई तक प्रति दिन की रिपोर्ट पोर्टल के साथ- साथ एनपीसीसीएचएच कोषांग के ई-मेल पर भी पोस्ट करने के लिए कहा गया है।

सीएस को दिये गये ये निर्देश
राज्य के सभी सीएस को इस संबंध में अलग से निर्देश दिये गये हैं। मिली खबर के मुताबाक सदर व सीएचसी में पर्याप्त स्टाफ, आईवी फ्लूड, ओआरएस सहित आवश्यक दवा व उपकरणों की व्यवस्था करने का कहा गया है। जिला एवं प्रखंड स्तर पर आपातकालीन रैपिड रेस्पांस टीम का गठन करने को कहा गया है। प्राथमिक उपचार कक्ष में ओआरएस कॉर्नर और ओपीडी मरीजों के लू के लक्षणों की जांच की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही त्वरित पहचान के लिए स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का अनुपालन इमरजेंसी में करने का निर्देश दिया गया है। वार्ड और ओपीडी में मरीजों के लिए वाटर कूलर व एयरकूलर की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। निर्देशों के पालन में कोताही बरतने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गयी है।

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