द फॉलोअप, रांची
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा(JTET) के लिए आवेदन की तिथि बढ़ा कर 20 जून कर दी गयी है। मगही, भोजपुरी और अंगिका को लेकर उत्पन्न विवाद अपनी जगह है, पर राज्य के किसी भी जिले का कोई भी अभ्यर्थी, मनचाहे ढंग से कोई भी क्षेत्रीय या जनजातीय भाषा चुन सकता है। उस मनचाहे भाषा में परीक्षा दे सकता है। 26 मार्च 2026 को प्रकाशित हुए गजट नोटिफिकेशन में इसका स्पष्ट उल्लेख है। हालांकि इस नियमावली की अनुसूची-1 में जिलावार क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की सूची दी गयी है। जिलावार भाषा की सूची दिए जाने से JTET का फॉर्म भरनेवाले अभ्यर्थियों में एक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वे यह मान कर अपना फॉर्म भर रहे हैं कि अनुसूची-1 में जिस जिले के लिए जिस जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा का नाम दर्ज है, उन्हीं में से किसी एक भाषा को चुनना उनकी बाध्यता है। पर नियमावली ऐसा नहीं कहता।


नियमावली में कहा गया है कि भाषा-टू की परीक्षा के लिए कोई भी अभ्यर्थी अनुसूची-1 में उल्लेखित क्षेत्रीय/जनजातीय भाषाओं में से कोई एक भाषा चुन सकता है। अब अनुसूची-1 पर गौर करें तो उसमें राज्य के 24 अलग अलग जिलों के सामने अलग अलग क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के नाम दर्ज हैं। इससे यह भ्रम होता है कि जो अभ्यर्थी जिस जिले का है, वह उसी जिले के सामने दर्ज भाषाओं में से किसी एक को एडॉप्ट करे। इधर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के जानकार बताते हैं कि नियमावली में जब किसी भी जनजातीय या क्षेत्रीय भाषा को चुनने का स्पष्ट विकल्प दिया गया है तो उन भाषाओं को जिलावार दर्शाने की जरूरत ही नहीं थी।
