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एमपी, राजस्थान के बाद बिहार में वैश्य, यूपी में कुर्मी तो झारखंड में कौन होगा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

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द फॉलोअप डेस्क
भाजपा अपनी सांगठनिक ईकाइयों को एक एक कर दुरुस्त करने में जुट गयी है। 13 दिसंबर को पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया। 14 को पार्टी ने बिहार के नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। अगले ही दिन फिर पार्टी ने 15 दिसंबर को संजय सरावगी को बिहार प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इस तरह अब सबकी नजर झारखंड पर आ टिकी है। सवाल खड़ा हो गया है कि झारखंड का अगला प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कौन होगा। वैसे पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और प्रदेश भाजपा प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने शनिवार को रांची पहुंच कर पार्टी मुख्यालय में संगठनात्मक चुनाव की समीक्षा की। जल्द से जिलाध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। हालांकि झारखंड में मंडल अध्यक्षों के निर्वाचन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बाद जिलाध्यक्षों के निर्वाचन की प्रक्रिया भी जल्द प्रारंभ कर दिए जाने की संभावना है।


जातीय समीकरण क्या कहता है
भाजपा ने नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। वही पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष भी होंगे। नितिन नवीन की मूल जाति कायस्थ है। वह सवर्ण हैं। इस तरह पार्टी ने इस बार केंद्र में ओबीसी, दलित, महिला की जगह सवर्ण को मौका दिया है। लेकिन प्रादेशिक समीकरण अलग है। हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा ने पहले मदन राठौर को राजस्थान प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया। राठौर ओबीसी समुदाय से आते हैं और उनकी जाति घांची है। इसी तरह मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी भाजपा ने हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप रखी है। खंडेलवाल भी ओबीसी समुदाय से आते हैं।


इसके बाद आज बिहार प्रदेश भाजपा की कमान संजय सरावगी को सौंपी गयी है। सरावगी मारवाड़ी हैं और वह भी ओबीसी समुदाय से आते हैं। इससे पहले यूपी जैसे बड़े राज्य में भाजपा ने पंकज चौधरी को कमान सौंपा। वह कुर्मी जाति और ओबीसी समुदाय से आते हैं। इस तरह अब झारखंड प्रदेश भाजपा की कमान किसके हाथ में जाएगी, यह बड़ा सवाल है। पार्टी का एक धरा अब झारखंड में फिर किसी ओबीसी को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर संदेह व्यक्त कर रहा है। हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि मंडल के बाद जिलाध्यक्षों के चुनाव के साथ प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष प्रो आदित्य साहु को ही प्रदेश भाजपा की कमान सौंप दी जाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यहां किसी दलित या सवर्ण के सिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का ताज मिल सकता है। उसमें रवींद्र कुमार राय, अनंत ओझा या अमर कुमार बाउरी का चांस बन सकता है।

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