रांची
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के साथ ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित आदिवासी आस्था स्थलों पर पूजा-अर्चना करना देश की जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मान्यता दिलाने वाला कदम बताया।
आदित्य साहू ने कहा कि संथाल और हो समुदायों के लिए जाहेर स्थल केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। उनके अनुसार इन स्थलों से समुदाय की परंपराएं, रीति-रिवाज और सामुदायिक जीवन जुड़ा हुआ है।
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केंद्र सरकार ने आदिवासियों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया
प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति और योगदान को राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुखता देने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने, आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालयों की स्थापना तथा जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिए जाने का उल्लेख किया।

शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया
आदित्य साहू ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना आदिवासी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनजातीय कल्याण योजनाओं, विशेष रूप से पीएम जनमन योजना और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार सरकार की नीतियां आदिवासी विरासत, पहचान और नेतृत्व को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में केंद्रित हैं।