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सेना के जवान को जेल भेजने के मामले में जुगसलाई थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मी निलंबित

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द फॉलोअप डेस्कः
जम्मू-कश्मीर के अखनूर में सेना में हवलदार सूरज राय (जुगसलाई निवासी) की गिरफ्तारी, थाना परिसर में मारपीट और जेल भेजने के मामले में जोनल आइजी की रिपोर्ट पर शुक्रवार को एसएसपी किशोर कौशल ने जुगसलाई थाना प्रभारी सचिन कुमार दास समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस मामले में एसएसपी ने जुगसलाई थाना प्रभारी सचिन कुमार दास के अलावा एसआइ दीपक कुमार महतो, तपेश्वर बैठा, शैलेंद्र कुमार नायक, कुमार सुमित, मंटू कुमार समेत दो आरक्षी शैलेश कुमार सिंह और शंकर कुमार को निलंबित किया है। 
मालूम हो कि गत 19 मार्च को डीजीपी के निर्देश पर जोनल आइजी अखिलेश झा व कोल्हान डीआइजी मनोज रतन चौथे ने घटना की जांच की थी। जांच के दौरान पाया गया कि सूरज राय को फोन कर पहले थाना बुलाया गया था, जिसके बाद उसके साथ थाना परिसर में मारपीट की गयी थी। गत 14 मार्च को होली के दौरान जुगसलाई के विंध्यवासिनी मंदिर के पास कपाली थाना प्रभारी सोनू कुमार का कुछ युवकों से विवाद हो गया था। सूचना मिलने पर जुगसलाई थाना की पुलिस पहुंची और सूरज राय व उसके चचेरे भाई विजय राय को पकड़कर थाना ले गयी। 


पुलिस के अनुसार, थाना में सूरज और विजय ने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की, जिसके बाद एसआई दीपक महतों के बयान पर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का केस दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया गया। वहीं, सूरज राय के परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें झूठे केस में फंसाकर पीटा। परिजनों के मुताबिक, थाना का निजी चालक छोटू कुमार ने एक युवक के पैर पर बाइक चढ़ा दी थी, जिससे विवाद हुआ। बाद में सूरज को फोन कर बुलाया गया और उसकी पिटाई कर जेल भेज दिया गया। इस मामल में सेवानिवृत्त सेना के जवानों ने उपायुक्त और एसएसपी से मामले की शिकायत की थी।


दूसरी ओर सेना के जवान के गिरफ्तारी के बाद जमशेदपुर के पूर्व सैनिक परिषद के लोगों ने जुगसलाई थाना और जमशेदपुर के डीसी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि जुगसलाई पुलिस ने सूरज राय की गिरफ्तारी की सूचना जम्मू यूनिट या सोनारी आर्मी कैंप को नहीं दी थी। जिससे सेना प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। 17 मार्च को रिटायर्ड पुलिसकर्मियों ने डीसी ऑफिस के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। जिससे मामला रक्षा मंत्रालय और आर्मी मुख्यासय तक पहुंचा। इधर, मामले में कोल्हान डीआईजी ने अपनी जांच रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेजी थी।