रांची
झारखंड में चर्चित भूमि घोटाले और कई बड़े मनी लाउंड्रिंग मामलों की जांच कर चुके ईडी के पूर्व अपर निदेशक कपिल राज ने इस्तीफा दे दिया है। केंद्र सरकार ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है। कपिल राज दिसंबर 2024 में प्रवर्तन निदेशालय से वापसी के बाद दिल्ली में अपने मूल विभाग DGGI (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज इंटेलिजेंस) के दिल्ली जोन में अपर आयुक्त के पद पर तैनात थे।
कपिल राज ने झारखंड में ईडी के जोनल कार्यालय में संयुक्त निदेशक और फिर अपर निदेशक के रूप में कार्य करते हुए राज्य के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों की पड़ताल की थी। साल 2022 में उन्हें झारखंड स्थित ईडी कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार मिला था।

इस दौरान उन्होंने न केवल लैंड स्कैम की गहन जांच की, बल्कि अवैध खनन, मनरेगा घोटाला, ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी और कई अन्य घोटालों की परतें भी खोलीं। उनके कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जबकि मनी लाउंड्रिंग जांच के दौरान कई मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई। इस दौरान, आईएस पूजा सिंघल, आईएएस छविरंजन, सीएम सुमन कुमार, तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम जैसे हाईप्रोफाइल लोग सलाखों के पीछे भेजे गये। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी भी उन्हीं की जांच के दौरान हुई है।
बहरहाल, झारखंड के अलावा कपिल राज ने दिल्ली शराब नीति घोटाले, यस बैंक फ्रॉड, पंजाब नेशनल बैंक घोटाला और पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में भी निर्णायक भूमिका निभाई। दिल्ली शराब नीति केस में उन्होंने दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी सुनिश्चित कर देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।

ईडी में आठ वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर रहने के बाद कपिल राज की सेवा दिसंबर 2024 में मूल विभाग में लौटा दी गई थी। अब उनके इस्तीफे को लेकर नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में हलचल है। कारणों का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अटकलें हैं कि वे जल्द किसी बड़ी निजी संस्था में कानूनी सलाह, नियामकीय निगरानी या जांच से जुड़ी भूमिका निभा सकते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कपिल राज एक तेज-तर्रार जांचकर्ता माने जाते थे और उन्हें पेचीदा मामलों को सुलझाने की खास क्षमता के लिए जाना जाता रहा है।
