सरायकेला-खरसावां:
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल डैम का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। इससे रबी फसल डूब जाने की आशंका है। हाथीनादा समेत ईचागढ़ प्रखंड के दर्जनों गांव में किसान फसल डूब जाने की आशंका से डरे हुए हैं। किसानों को चिंता सता रही है कि पूरे साल की मेहनत के बाद तैयार हुई फसल खराब हो जायेगी। किसानों ने डैम के आसपास के खेतों में रबी धान की खेती की थी। अचानक हुई बारिश से खेतों में 2 फीट तक पानी भर गया है। यही जलस्तर बना रहा तो धान की फसल सड़ने का खतरा है।

किसानों ने कर्ज लेकर जुटाई थी पूंजी
किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर बीज, खाद, कीटनाशक और जुताई-रोपाई के लिए पैसा जुटाया था। इसके लिए गहने तक गिरवी रखने पड़े। फसल डूबी तो लागत निकालना भी कठिन होगा। ये किसान पूरे साल में केवल एक फसल ही लगा पाते हैं। गौरतलब है कि विस्थापित किसानों के लिए यही फसल इस साल की आखिरी उम्मीद है। डूब गई तो भारी संकट पैदा होगा।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उदासीन
पीड़ित किसान स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर डीसी और डैम डिवीजन कार्यालय के पदाधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने कम से कम 15 दिन के लिए रेडियल गेट खोलने की मांग की है ताकि जलस्तर कम हो सके। फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सके, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई। किसानों ने यहां तक कह दिया है कि यदि वक्त रहते डैम का जलस्तर कम नहीं हुआ तो फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। किसान कर्ज तले दब जाएंगे और आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

विस्थापित अधिकार एकता मंच क्या बोला
विस्थापित अधिकार एकता मंच के संस्थापक राकेश रंजन महतो ने कहा कि अब मरने नहीं, बल्कि छीनने की बात होगी। हक-अधिकार की लड़ाई अंतिम चरण तक लड़ेंगे। किसी भी हाल में डैम का रेडियल गुट खुलवाया जाएगा। फसल बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

क्या सुनी जाएगी किसानों की शिकायत
हाथीनादा के ग्रामीणों की शिकायत है कि उन्हें अभी तक जमीन का मुआवजा नहीं मिला। खेत में तैयार खड़ी फसल डूब रही है। ग्रामीणों ने तत्काल सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की है। चांडिल डैम के विस्थापित किसानों की लड़ाई काफी पुरानी है। किसानों की शिकायत है कि उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिला। उनका सही ढंग से पुनर्वास नहीं किया गया और वे सालों से विस्थापितों की जिंदगी जी रहे हैं। जब भी डैम का जलस्तर बढ़ता है, फसल डूब जाती है। सालों से यह समस्या है लेकिन समाधान नहीं हुआ। क्या अब किसानों की शिकायत सुनी जायेगी।