रांची
ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में आज 335वां वार्षिक महोत्सव पूरे धार्मिक उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। बड़कागढ़ रियासत के राजा ठाकुर एनी नाथ शाहदेव द्वारा वर्ष 1691 ईस्वी में स्थापित यह मंदिर हिंदू आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां महाप्रभु जगन्नाथ बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र स्वामी के साथ विराजमान हैं।
25 दिसंबर को आयोजित वार्षिक महोत्सव के अवसर पर महाप्रभु ने नवीन वस्त्र धारण किए। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से भव्य रूप से सजाया गया। इस पावन अवसर पर हजारों महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने 1008 विष्णु सहस्त्रनाम (श्री विष्णु लक्ष्य अर्चना) में भाग लेकर आने वाले वर्ष के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।

अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने गेंदा पुष्प और तुलसी दल के साथ विष्णु जी के 1008 नामों का जाप किया। इसके पश्चात महाप्रभु की आरती हुई, विष्णु अष्टकम का पाठ किया गया और खिचड़ी, खीर व सब्जी से युक्त गंज भोग अर्पित किया गया। जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति द्वारा पूरे कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 10,000 श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोग-प्रसाद की व्यवस्था की गई। प्रसाद वितरण दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक लगातार चला, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
विष्णु सहस्त्रनाम अर्चना से पूर्व गणपति हवन और विष्णु हवन संपन्न कराया गया, जिसमें न्यास समिति के सदस्य राजीव रंजन मिश्रा एवं उनकी पत्नी यजमान रहे। संपूर्ण आयोजन मंदिर के प्रथम सेवक ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव की देखरेख में संपन्न हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान में सुबोध कांत सहाय, एन एन पांडे, अविजित घोष, विकास पांडे, मीरा अग्रवाल, आर के झा, यदुनाथ पांडे सहित हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूजा-अर्चना मंदिर के पुजारी कोशतुब्धार मिश्रा, अश्वनी मिश्रा और राम महंती द्वारा कराई गई। वहीं मंदिर व्यवस्था में कई अन्य पुजारियों एवं शिव योग के शिष्यों ने सहयोग किया। श्रद्धालुओं ने महाप्रभु जगन्नाथ से देश और झारखंड राज्य के निरंतर विकास एवं सुख-शांति की कामना की।
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